एसडीएम से डीएसपी तक कार्रवाई के दायरे में, कृषि, पीडब्ल्यूडी और वाणिज्यिक कर समेत कई विभागों के अधिकारी शामिल
जयपुर, 24 अक्टूबर।
राजस्थान में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में राज्य सरकार ने 27 अधिकारियों के खिलाफ 21 प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्तर पर दी गई इस मंजूरी के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इन मामलों में राजस्व, पुलिस, ग्रामीण विकास और विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति दिए जाने को प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्रवाई के दायरे में उपखंड अधिकारी (एसडीएम), पुलिस उपअधीक्षक (डीएसपी), राजस्थान लेखा सेवा के अधिकारी, विकास अधिकारी तथा अन्य विभागों के कार्मिक शामिल बताए गए हैं।
जमीन से जुड़े मामलों में दो एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई
प्राप्त विवरण के अनुसार, दो तत्कालीन उपखंड अधिकारियों के खिलाफ भूमि संबंधी मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी गई है। इनमें कृषि भूमि का नियमों के विरुद्ध गैर-कृषि प्रयोजन के लिए रूपांतरण करने तथा खातेदारी भूमि से संबंधित मामले शामिल हैं।
आरोपों के मुताबिक, संबंधित मामलों में पद के दुरुपयोग और नियमों के विपरीत निर्णय लेने की आशंका सामने आई थी। एक अन्य प्रकरण में खातेदारी भूमि का दावा डिक्री करवाने तथा इसके बदले कथित रूप से अवैध परितोषण प्राप्त करने से जुड़े आरोप हैं। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
डीएसपी, लेखा सेवा अधिकारी और विकास अधिकारी भी शामिल
भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में एक तत्कालीन पुलिस उपअधीक्षक के खिलाफ भी अभियोजन स्वीकृति दी गई है। संबंधित प्रकरण में पद के प्रभाव का कथित दुरुपयोग, अवैध राशि वसूलने और ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं।
इसके अतिरिक्त राजस्थान लेखा सेवा के एक अधिकारी तथा ग्रामीण विकास से जुड़े एक विकास अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की मंजूरी दी गई है। इन मामलों में सरकारी धन के प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच की गई थी।
आठ विभागों के 15 प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति
सरकार के निर्णय के तहत आठ विभागों से संबंधित 15 अन्य प्रकरणों में भी अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। विभागवार विवरण इस प्रकार बताया गया है—
कृषि एवं उद्यानिकी विभाग में पांच प्रकरण, सार्वजनिक निर्माण विभाग में तीन, वाणिज्यिक कर विभाग में दो तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, देवस्थान, इंदिरा गांधी नहर परियोजना और सहकारिता विभाग में एक-एक प्रकरण शामिल है।
इस प्रकार विभिन्न विभागों में सामने आए मामलों को मिलाकर कुल 21 प्रकरणों में 27 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति दी गई है।
अभियोजन स्वीकृति के बाद आगे क्या होगी प्रक्रिया?
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच के बाद अभियोजन स्वीकृति मिलने पर संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके बाद नियमानुसार आरोपपत्र दाखिल करने, न्यायालय में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण की प्रक्रिया होगी।
अभियोजन स्वीकृति का अर्थ संबंधित अधिकारियों को दोषी ठहराया जाना नहीं है। आरोपों की सत्यता का निर्धारण न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। राज्य सरकार की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही तय करने और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है। अब संबंधित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने पर निगाहें रहेंगी।