कोटा

राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 : विजय श्री रंगमंच पर जीवंत हुई राजस्थानी लोक परंपरा, कृष्ण महारास पर मंत्र मुक्त हुए दर्शन

Admin Desk
23 Oct 2026, 11:23 PM
Pramukh Samvad
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​कोटा, 23 अक्टूबर।

133वें राष्ट्रीय मेला दशहरा 2026 के अंतर्गत शुक्रवार को विजयश्री रंगमंच पर राजस्थानी लोक परंपरा की अद्भुत छटा बिखरी। राजस्थान पर्यटन विभाग तथा नगर निगम कोटा के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में प्रदेशभर से आए नामचीन कलाकारों ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखकर दर्शक भाव-विभोर हो गए और पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।  

​कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर नगर निगम कोटा के पूर्व उपमहापौर योगेन्द्र खींची, नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर जितेन्द्र सिंह राजावत, भाजपा कोटा शहर के सहकारिता प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष महीप सिंह सौलंकी, और ब्राह्मण कल्याण परिषद के संयोजक अनिल तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।  महापौर अनुसूया गोस्वामी, मेला अधिकारी व नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा ने अतिथियों का स्वागत किया। उपायुक्त एवं सहायक मेला अधिकारी धीरज कुमार सोनी, मुख्य अभियंता व सहायक मेला अधिकारी महेश चंद्र गोयल, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर पार्षद सीमा चौधरी, सुनीता नायक भी उपस्थित रहे।

​सांस्कृतिक संध्या का शानदार आगाज बाड़मेर के भुट्टा खाँ लंगा पार्टी द्वारा प्रस्तुत सुरीले राजस्थानी गीत "केसरिया बालम आओ पधारो मारे देस..." से हुआ। दिल को छू लेने वाली खड़ताल की धुन के साथ उन्होंने "बेचुरा बेचुरा..." और "दमा दम मस्त कलंदर..." जैसे गीतों से मरुधरा की माटी की महक बिखेर दी।  

​इसके पश्चात मंच पर कोटा के कुणाल गंधर्व द्वारा "नीम की निमौली मारे..." और "प्यारो लागे म्हारों राजस्थान" गीतों पर ग्रामीण भवाई नृत्य की लुभावनी प्रस्तुति दी गई। कोटा की विनिता चौहान द्वारा ऊर्जावान बिन्दौरी नृत्य प्रस्तुत किया गया। बाड़मेर की  लीला देवी द्वारा बिन्दौरी नृत्य, अलवर के पद्मश्री सम्मानित कलाकार गफरूद्दीन मेवाती द्वारा भपंग वादन, कोटा की बरखा जोशी द्वारा शास्त्रीय कथक, और रामदयाल छाबड़ा द्वारा चकरी नृत्य प्रस्तुत किया गया। कोटा की रितु जोशी द्वारा लोक गीत गायन तथा अजमेर की अरूशिखा खांगारोत एवं दल द्वारा 'घूमर नृत्य' और सहरिया स्वांग की प्रस्तुतियां दी गईं। वहीं, अजमेर की अरूशिखा खांगारोत द्वारा सिर पर प्रज्वलित मटकियां रखकर किए गए चरी नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।  

​पर्दा भवई और 'कृष्ण महारास' ने जमाया रंग

​कार्यक्रम के उत्तरार्ध में बाड़मेर के गौतम परमार एवं भुट्टा खाँ द्वारा प्रस्तुत रोमांचक पर्दा भवई नृत्य को देखकर दर्शक दंग रह गए। संतुलन और अद्भुत कौशल से परिपूर्ण इस कला ने सभी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद 'डेजर्ट सिम्फनी' की जुगलबंदी हुई।  

​सांस्कृतिक संध्या का समापन डीग (भरतपुर) के अशोक शर्मा एवं उनके दल द्वारा प्रस्तुत 'कृष्ण महारास नृत्य' के साथ हुआ। भगवान श्री कृष्ण और गोपियों की रासलीला के इस मनमोहक दृश्य को देखकर पूरा विजयश्री रंगमंच भक्ति के रंगों में सराबोर हो गया।

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