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कुत्ते के काटने के बाद गाय की रेबीज से मौत, उसी के दूध से बना था चरणामृत; 450 लोगों ने लगवाए रेबीज इंजेक्शन

Sanjay kumar
22 Oct 2026, 06:38 PM
Pramukh Samvad
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दुर्गा पूजा के दौरान बांटे गए चरणामृत को लेकर ग्रामीणों में दहशत, गाय की संदिग्ध रेबीज से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया टीकाकरण शिविर

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) , 22 अक्टूबर।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में गाय के दूध से बने चरणामृत के सेवन के बाद रेबीज संक्रमण की आशंका को लेकर हड़कंप मच गया। गोला ब्लॉक के डाड़ी खास गांव में दुर्गा पूजा के दौरान जिस गाय के दूध से चरणामृत तैयार किया गया था, उस गाय को आवारा कुत्ते के काटने की आशंका जताई गई। बाद में गाय की असामान्य हालत के बीच मौत हो जाने की खबर सामने आई, जिसके बाद चरणामृत का सेवन करने वाले श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई। एहतियात के तौर पर अब तक करीब 450 लोगों ने एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई है।

दो दिनों में 450 लोगों का टीकाकरण

जानकारी के अनुसार, घटना सामने आने के बाद मंगलवार को करीब 50 लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे। वहीं, बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डाड़ी खास गांव में शिविर लगाकर लगभग 400 लोगों का टीकाकरण किया। इस तरह दो दिनों में करीब 450 लोगों को वैक्सीन लगाई गई।

ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई, क्योंकि संबंधित गाय का दूध गांव की कुछ दुकानों और घरों तक भी पहुंचाया जाता था। इससे चरणामृत के अलावा दूध का सेवन करने वाले लोगों में भी आशंका पैदा हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।

गाय की तबीयत बिगड़ने के बाद सामने आया मामला

पशुपालक नवमी यादव के अनुसार, उन्हें जानकारी नहीं थी कि गाय को आवारा कुत्ते ने कब काटा था। गाय की तबीयत पिछले एक-दो दिनों से खराब थी, लेकिन मंगलवार को उसकी हालत अधिक बिगड़ गई। इसके बाद उसे निजी पशु चिकित्सकों और स्थानीय पशु चिकित्सालय में दिखाया गया। पशु चिकित्सकों ने गाय को कुत्ते के काटने और रेबीज की आशंका जताई।

पशुपालक के मुताबिक, गाय ने कुछ समय बाद असामान्य व्यवहार करना शुरू कर दिया और भौंकने लगी। मंगलवार देर शाम उसकी मौत हो गई। गाय की मौत और रेबीज की आशंका की जानकारी सामने आने के बाद चरणामृत का सेवन करने वाले डाड़ी खास तथा गोविंदपुर गांव के लोगों में डर फैल गया।

स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया शिविर

स्थिति को देखते हुए बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम गांव पहुंची। फार्मासिस्ट सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्यकर्मियों ने शिविर लगाकर ग्रामीणों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण टीकाकरण का कार्य लगातार जारी रहा।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित लोगों को चिकित्सकीय आकलन के आधार पर वैक्सीन की आवश्यक खुराकें पूरी करनी चाहिए। रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, इसलिए संभावित जोखिम की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

डिप्टी सीएमओ ने बताई राहत की बात

गोरखपुर जिला चिकित्सालय के डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी लेने पर पता चला कि गाय के दूध से चरणामृत बनाया गया था और एहतियात के तौर पर करीब 450 लोगों ने एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई है।

उन्होंने कहा कि चरणामृत बनाने की प्रक्रिया में दूध को उबाला जाता है, जिससे रेबीज वायरस के जीवित रहने की संभावना नहीं रहती। हालांकि, किसी व्यक्ति को वास्तविक जोखिम हुआ है या नहीं, इसका आकलन चिकित्सकीय सलाह के आधार पर किया जाना चाहिए।

महत्वपूर्ण: रेबीज के संभावित संपर्क को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को संक्रमित पशु की लार से सीधे संपर्क, काटने या खरोंचने जैसी घटना हुई हो, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। केवल दूध या चरणामृत के सेवन से रेबीज फैलने का जोखिम सामान्यतः अत्यंत कम माना जाता है, लेकिन किसी भी संभावित संपर्क की स्थिति में अंतिम निर्णय चिकित्सक ही करें।

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