मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसाने की तैयारी, दोनों अभयारण्यों में फिलहाल 15 बाघ-बाघिन मौजूद
आनुवंशिक विविधता बढ़ाने के साथ शिकार प्रजातियों को मजबूत करने की योजना, दिल्ली से लाए जाएंगे 400 चीतल
कोटा, 22 अक्टूबर। राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में बाघों की आबादी बढ़ाने और उनके संरक्षण को नई मजबूती देने के लिए वन विभाग ने अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण योजना के दूसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन को राजस्थान लाया जाएगा। इन बाघिनों को मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसाने की योजना है। अधिकारियों की आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वन विभाग को उम्मीद है कि दिवाली के बाद दोनों बाघिनें हाड़ौती के जंगलों में पहुंच सकती हैं।
वर्तमान में मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में कुल मिलाकर 15 बाघ-बाघिन मौजूद हैं। नई बाघिनों के आने से दोनों टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ उनके प्रजनन और संरक्षण की संभावनाओं को भी बल मिलने की उम्मीद है।
पांच बाघिनों को लाने की है योजना
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्वीकृति के बाद हाड़ौती के दोनों टाइगर रिजर्व में दूसरे राज्यों से कुल पांच बाघिनें लाने की योजना बनाई गई है। इसके पहले चरण में मध्य प्रदेश के पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से दो बाघिनें लाई जा चुकी हैं। ये बाघिनें स्थानीय वातावरण के अनुकूल ढलते हुए अपने क्षेत्र निर्धारित कर चुकी हैं।
अब दूसरे चरण में महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से दो बाघिनें लाने की तैयारी है। योजना के अंतिम चरण में मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और बाघिन को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया जाएगा। इस तरह चरणबद्ध तरीके से हाड़ौती के जंगलों में बाघों की आबादी को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर में होगी निगरानी
नई बाघिनों को सुरक्षित वातावरण में बसाने के लिए दोनों टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर तैयार किए गए हैं। स्थानांतरण के बाद बाघिनों को कुछ समय तक इन विशेष बाड़ों में रखा जाएगा, ताकि वे नए वातावरण और परिस्थितियों के अनुकूल हो सकें। इसके बाद परिस्थितियां अनुकूल पाए जाने पर उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
बाघिनों की गतिविधियों, क्षेत्र विस्तार और अनुकूलन पर नजर रखने के लिए उनके गले में रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। इससे वन विभाग को उनकी लोकेशन और गतिविधियों की निगरानी करने में मदद मिलेगी। पिछले चरण में मध्य प्रदेश से बाघिनों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से लाया गया था। इस बार भी स्थानांतरण निर्धारित प्रोटोकॉल और संबंधित अधिकारियों की मंजूरी के अनुसार किया जाएगा।
बाघों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाने पर जोर
इस योजना का उद्देश्य केवल बाघों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना भी है। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से बाघिनों के आने से भविष्य में प्रजनन के दौरान जीन प्रवाह बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे बाघों की नई पीढ़ी की आनुवंशिक सेहत और दीर्घकालीन संरक्षण को लाभ मिलने की उम्मीद है।
शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने की भी तैयारी
बाघों के संरक्षण के लिए जंगल में पर्याप्त शिकार प्रजातियों की उपलब्धता जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत दिल्ली के डियर पार्क से 400 चित्तीदार हिरण यानी चीतल लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। चीतलों की उपलब्धता बढ़ने से बाघों के लिए प्राकृतिक भोजन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट के अनुसार, संबंधित अधिकारियों की मंजूरी मिलते ही बाघिनों का चयन कर उनके स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वन विभाग की इस पहल से हाड़ौती क्षेत्र में बाघ संरक्षण को नई दिशा मिलने और दोनों टाइगर रिजर्व की पारिस्थितिकी को मजबूत करने की उम्मीद है।