नई दिल्ली । सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों और जान गंवाने वालों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की योजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया है। अदालत ने पूछा है कि जब सड़क हादसे में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है या वह गंभीर रूप से घायल हो जाता है, तो बिना बीमा वाले वाहन से हुए हादसे के पीड़ितों को अंतरिम मुआवजे की योजना से बाहर क्यों रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा। अदालत ने यह भी कहा कि मुआवजे की योजना के बारे में लोगों को जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोग समय पर आर्थिक सहायता के लिए आवेदन कर सकें।
मौत पर 2 लाख और गंभीर चोट पर 1 लाख रुपये की सहायता
केंद्र सरकार की प्रस्तावित ‘कंपनसेशन टू विक्टिम्स (इंटरिम रिलीफ) स्कीम, 2026’ के तहत सड़क हादसे में किसी व्यक्ति की मौत होने पर उसके परिवार को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने पर 1 लाख रुपये की अंतरिम आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।
अंतरिम मुआवजे का मतलब है कि पीड़ित परिवार या घायल व्यक्ति को अंतिम मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होने से पहले शुरुआती आर्थिक मदद मिल सके। हालांकि, इस योजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है कि इसका लाभ केवल बीमित वाहनों से जुड़े हादसों तक ही क्यों सीमित रखा गया है।
बिना बीमा वाले वाहन से हादसा होने पर क्या करना होगा?
केंद्र सरकार के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि यह योजना मोटर वाहन अधिनियम के उन प्रावधानों के तहत तैयार की गई है, जो बीमित वाहनों से संबंधित हैं। अधिकारियों के अनुसार, यदि हादसे के लिए जिम्मेदार वाहन का बीमा नहीं है, तो पीड़ित को मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) में जाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट का सवाल इसी बात पर है कि बिना बीमा वाले वाहनों से हादसे का शिकार होने वाले लोगों को भी तत्काल आर्थिक राहत देने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई है।
योजना का प्रचार करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी गौर किया कि योजना को अब तक अधिसूचित नहीं किया गया है और लोगों के बीच इसका पर्याप्त प्रचार भी नहीं हुआ है। अदालत ने केंद्र सरकार को योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि हादसों के पीड़ितों और उनके परिवारों को अपने अधिकारों की जानकारी मिल सके।
केंद्र के सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि योजना का मसौदा 23 फरवरी को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया था। इसे केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत अधिसूचित किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में मंत्रालय को ऐसी योजना तैयार करने का निर्देश दिया था।
कानून में पहले से कितना मुआवजा निर्धारित है?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164 के तहत सड़क हादसे में मौत होने पर 5 लाख रुपये और गंभीर चोट लगने पर 2.5 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत पीड़ित को यह साबित करने की जरूरत नहीं होती कि हादसा वाहन मालिक की गलती या लापरवाही के कारण हुआ था।
प्रस्तावित योजना के तहत मिलने वाली 2 लाख या 1 लाख रुपये की राशि अंतरिम राहत के रूप में निर्धारित की गई है। अंतिम मुआवजे का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अधिकरण के आदेश के अनुसार हो सकता है।
हादसे के पीड़ितों के लिए क्यों अहम है यह मामला?
सड़क हादसे के बाद पीड़ित परिवारों को इलाज, रोजमर्रा के खर्च और कमाने वाले सदस्य की मृत्यु से जुड़ी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तत्काल आर्थिक सहायता काफी महत्वपूर्ण होती है। सुप्रीम कोर्ट का सवाल इस बात पर केंद्रित है कि बिना बीमा वाले वाहनों से हादसे का शिकार होने वाले लोगों को भी राहत देने के लिए उचित व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल, बिना बीमा वाले वाहनों को इस अंतरिम राहत योजना में शामिल करने को लेकर सरकार का अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है। इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई और सरकार के जवाब से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।