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Himalaya Liv.52 की बोतल में पशुओं का लिवर टॉनिक भरकर बेचने वाला मेडिकल स्टोर संचालक गिरफ्तार

Admin Desk
21 Oct 2026, 11:04 PM
Pramukh Samvad
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सूरत (गुजरात)। गुजरात के सूरत में दवाओं की बिक्री से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने शांतिनाथ मेडिकल स्टोर के संचालक मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला (51 वर्ष) को कथित तौर पर पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फीड सप्लीमेंट को बच्चों की दवा बताकर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन की संयुक्त छापेमारी में इस कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

पुलिस के अनुसार, आरोपी गोपीपुरा क्षेत्र के मोमनावाद रोड स्थित अपने मेडिकल स्टोर से पशुओं और पोल्ट्री के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘Himalaya Liv.52 Protec Liquid’ को छोटी बोतलों में भरकर बेचने की गतिविधि में शामिल था। आरोप है कि बड़े कैन में आने वाले इस पशु फीड सप्लीमेंट को 60 मिलीलीटर और 100 मिलीलीटर की छोटी बोतलों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद उन पर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘Liv.52 Drops’ जैसे उत्पाद के कथित नकली लेबल लगाकर बाजार में बेचा जाता था।

पशुओं के फीड सप्लीमेंट को बच्चों की दवा बताकर बेचने का आरोप

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपी पशुओं के लिए निर्धारित बड़े पैक से तरल पदार्थ निकालकर छोटी बोतलों में भरता था। इसके बाद कथित तौर पर ऐसी पैकेजिंग और लेबलिंग की जाती थी, जिससे उत्पाद बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा जैसा दिखाई दे। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस तरीके से कितनी बोतलें तैयार की गईं और उन्हें किन-किन स्थानों पर बेचा गया।

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, पशुओं के लिए बने एक लीटर के पैक की कीमत करीब 330 रुपये बताई गई, जबकि 60 मिलीलीटर की बोतल पर मानव उपयोग की दवा के रूप में 160 रुपये का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) अंकित होने की जानकारी सामने आई। पुलिस को आशंका है कि इस तरीके से अवैध रूप से मुनाफा कमाया जा रहा था।

करीब एक हजार बोतलें बेचने की जानकारी

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में करीब 1,000 बोतलें बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपी कथित तौर पर लगभग एक वर्ष से इस गतिविधि में शामिल था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन बोतलों की बिक्री किन क्षेत्रों में हुई और क्या इनकी आपूर्ति अन्य मेडिकल स्टोर, अस्पतालों या क्लीनिकों तक भी की गई थी।

मामले में मेडिकल स्टोर के संचालन संबंधी लाइसेंस की भी जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुकान का संचालन आरोपी की बी.फार्म की पढ़ाई पूरी कर चुकी बेटी के फार्मासिस्ट लाइसेंस के आधार पर हो रहा था। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि कथित गतिविधि में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं।

विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज, नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 123, 125, 336(2), 336(3), 336(4) और 278 सहित अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी है। SOG और खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन की टीमें कथित नकली लेबल तैयार करने, बोतलों की आपूर्ति और इस गतिविधि से जुड़े संभावित नेटवर्क की जांच कर रही हैं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित रूप से बेचे गए उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा या नहीं। मामले में आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानी

इस मामले के सामने आने के बाद दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों की खरीदारी करते समय सतर्कता बरतना जरूरी है। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे दवा की सीलबंद पैकेजिंग, निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि और अन्य जरूरी विवरणों की जांच करें। संदेहास्पद लेबल, असामान्य पैकेजिंग या संदिग्ध कीमत वाले उत्पादों को खरीदने से बचें।

विशेष रूप से बच्चों को कोई भी दवा या स्वास्थ्य उत्पाद देने से पहले उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करें और चिकित्सक की सलाह लें। पशुओं के लिए निर्धारित फीड सप्लीमेंट को मानव उपयोग की दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी उत्पाद के नकली या गलत तरीके से बेचे जाने का संदेह होने पर संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग को इसकी सूचना दी जा सकती है।

नोट: यह समाचार पुलिस की प्रारंभिक जांच और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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