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सीआईएसएफ में 1 नवंबर से लागू होगा नया सुरक्षा ढांचा, बिजली से बंदरगाहों तक के लिए बनेंगे विशेष सेक्टर

Admin Desk
21 Oct 2026, 09:56 PM
Pramukh Samvad
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क्षेत्रीय व्यवस्था की जगह डोमेन आधारित कमान पर जोर, महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में आएगी विशेषज्ञता

कोटा/नई दिल्ली। देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक, आर्थिक और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं विशेषज्ञतापूर्ण बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) अपनी प्रशासनिक और परिचालन व्यवस्था में व्यापक बदलाव करने जा रहा है। गृह मंत्रालय की सहमति से स्वीकृत यह पुनर्गठन 1 नवंबर 2026 से लागू होगा। इसके तहत बल के आठ क्षेत्रीय सेक्टरों को विभिन्न उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संबंधी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यात्मक (फंक्शनल) सेक्टरों में पुनर्गठित किया जाएगा।

कोटा थर्मल के सुरक्षा प्रभारी डिप्टी कमांडेंट टी. होकिप एवं असिस्टेंट कमांडेंट बी.एल. मीणा ने बताया कि इस बदलाव का प्रमुख उद्देश्य एक ही प्रकार के औद्योगिक एवं रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को विशेष कमान के अंतर्गत लाना है। इससे सुरक्षा संबंधी निगरानी अधिक केंद्रित होगी, कार्यप्रणाली में एकरूपता आएगी तथा संबंधित मंत्रालयों, विभागों और प्रतिष्ठानों के प्रबंधन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

क्षेत्रीय व्यवस्था से विशेषज्ञता आधारित सुरक्षा प्रणाली की ओर कदम

सीआईएसएफ देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष संस्थानों, बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों, स्टील प्लांटों, पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों, सरकारी भवनों, संग्रहालयों, ऐतिहासिक स्मारकों और मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इन सभी प्रतिष्ठानों की कार्यप्रणाली, बुनियादी संरचना और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अलग-अलग होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय आधार पर निगरानी के बजाय संबंधित उद्योग एवं प्रतिष्ठान की प्रकृति के अनुरूप कमान व्यवस्था विकसित करना इस पुनर्गठन का प्रमुख आधार है।

इस नई प्रणाली में किसी विशेष उद्योग से संबंधित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को एक समान दृष्टिकोण के तहत संचालित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, सुरक्षा मानक तैयार करने, प्रशिक्षण को संबंधित क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप बनाने, संभावित खतरों का आकलन करने और परिचालन संबंधी निर्णयों में बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

सीआईएसएफ पहले ही हवाई अड्डों, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग से संबंधित सुरक्षा व्यवस्थाओं में कार्यात्मक दृष्टिकोण अपना चुका है। अब इसी अनुभव के आधार पर अन्य प्रमुख क्षेत्रों की कमान व्यवस्था को भी विशेषज्ञता आधारित स्वरूप दिया जा रहा है।

नए ढांचे में इस प्रकार होंगे सेक्टरों के बदलाव

पुनर्गठन के तहत मौजूदा क्षेत्रीय सेक्टरों को संबंधित औद्योगिक एवं सुरक्षा जरूरतों के अनुसार नया स्वरूप दिया गया है।

1. सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक एवं मेट्रो सेक्टर: नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) सेक्टर को पुनर्गठित कर सरकारी भवन, संग्रहालय एवं स्मारक तथा मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (GBMM & MRTS) सेक्टर बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत संबंधित सरकारी प्रतिष्ठानों, संग्रहालयों, स्मारकों और जन परिवहन प्रणालियों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

2. पावर सेक्टर-I और पावर सेक्टर-II: नई दिल्ली स्थित नॉर्थ सेक्टर को पावर-I सेक्टर तथा कोलकाता स्थित नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-II को पावर-II सेक्टर में परिवर्तित किया जाएगा। इससे बिजली क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए समर्पित कमान व्यवस्था विकसित होगी।

3. कोयला सेक्टर: रांची स्थित ईस्टर्न सेक्टर को कोयला सेक्टर के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। इससे कोयला खदानों और संबंधित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जरूरतों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

4. स्टील सेक्टर: भिलाई स्थित सेंट्रल सेक्टर अब समर्पित स्टील सेक्टर के रूप में कार्य करेगा। इस व्यवस्था से इस्पात उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप निगरानी और समन्वय को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

5. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर: गुवाहाटी स्थित नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर बनाया जाएगा। इससे इस महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को विशेष परिचालन ढांचे के अंतर्गत लाया जाएगा।

6. पश्चिमी एवं पूर्वी तट बंदरगाह सेक्टर: समुद्री व्यापार और बंदरगाहों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मुंबई स्थित वेस्टर्न सेक्टर को वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर तथा चेन्नई स्थित साउथ सेक्टर को ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर में बदला जाएगा। इससे दोनों तटों पर स्थित बंदरगाहों की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का अधिक केंद्रित प्रबंधन किया जा सकेगा।

वहीं, बेंगलुरु स्थित परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग (DAE & DoS) सेक्टर तथा नई दिल्ली स्थित एयरपोर्ट सेक्टर-I और बेंगलुरु स्थित एयरपोर्ट सेक्टर-II अपनी मौजूदा कार्यात्मक व्यवस्था के तहत काम करते रहेंगे।

बंदरगाहों की सुरक्षा को मिलेगा विशेष महत्व

भारत के समुद्री व्यापार और आपूर्ति शृंखला में बंदरगाहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक विशेषज्ञतापूर्ण बनाना इस पुनर्गठन का एक अहम पहलू है। पश्चिमी और पूर्वी तट के लिए अलग-अलग सेक्टर बनाए जाने से संबंधित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा निगरानी, परिचालन संबंधी समन्वय और क्षेत्र-विशेष की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।

सीआईएसएफ को अंतरराष्ट्रीय जहाज एवं बंदरगाह सुविधा सुरक्षा संहिता (ISPS Code) के तहत बंदरगाह सुरक्षा से संबंधित मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (Recognised Security Organisation—RSO) की भूमिका भी सौंपी गई है। ऐसे में बंदरगाहों के लिए समर्पित सेक्टरों की व्यवस्था समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में बल की विशेषज्ञता को और विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप जरूरी बदलाव

वर्तमान समय में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा केवल भौतिक निगरानी तक सीमित नहीं है। औद्योगिक परिसरों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों, परिवहन प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ साइबर खतरों, ड्रोन गतिविधियों और तकनीक आधारित जोखिमों से भी सुरक्षित रखना आवश्यक हो गया है।

ऐसे परिदृश्य में कार्यात्मक कमान व्यवस्था संबंधित क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रक्रियाओं और परिचालन समन्वय को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है। साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं का विकास भी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए लगातार बढ़ती जरूरतों में शामिल है।

इसके अतिरिक्त, सीआईएसएफ को जम्मू-कश्मीर में अति-संवेदनशील जेलों की सुरक्षा जैसी विशेष जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से जुड़ी उभरती आवश्यकताओं के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी, बेहतर निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय का महत्व और बढ़ गया है।

आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल

सीआईएसएफ का यह पुनर्गठन देश की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक उत्पादन, समुद्री व्यापार और महत्वपूर्ण सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम कदम है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सुरक्षा प्रबंधन में क्षेत्र-विशेष की विशेषज्ञता, जवाबदेही और परिचालन समन्वय को अधिक महत्व मिलेगा।

कुल मिलाकर, क्षेत्रीय कमान से कार्यात्मक कमान की ओर यह बदलाव सीआईएसएफ को बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक विशेषज्ञतापूर्ण और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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