कोटा

आशापुरा माताजी मंदिर में सजी भजन संध्या में श्रवण सेंदरी और भावेश पाराशर ने बांधा समां, भक्ति गीतों से गूंजा मेला प्रांगण

Admin Desk
19 Oct 2026, 11:35 PM
Pramukh Samvad
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कोटा, 19 अक्टूबर। राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 में दुर्गा अष्टमी का पावन अवसर भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक उल्लास के नाम रहा। सोमवार शाम आशापुरा माताजी मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य भजन संध्या में लोक गायकों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने ऐसा भक्तिमय वातावरण रचा कि देर रात तक पूरा परिसर भजनों और जयकारों से गूंजता रहा। राजस्थान के सुप्रसिद्ध लोक गायक श्रवण सेंदरी और युवा गायक भावेश पाराशर की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कहीं भजनों की धुन पर भक्तों ने तालियां बजाकर उत्साह व्यक्त किया, तो कहीं गौ माता की करुण पुकार पर आधारित भजन ने उपस्थित जनसमूह को भावुक कर दिया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

भजन संध्या का शुभारंभ महापौर अनसूईया गोस्वामी, मेला अधिकारी एवं आयुक्त ओपी मेहरा, भाजपा शहर जिला अध्यक्ष राकेश जैन, कोटा डेयरी चेयरमैन चैन सिंह राठौड़, शिक्षाविद महेश गुप्ता तथा पार्षद सुनीता सेन और राजीव गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रंग-बिरंगी रोशनी से सजे राष्ट्रीय दशहरा मेले के वातावरण में भक्ति संगीत ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

श्रवण सेंदरी के भजनों ने छेड़ी भक्ति की सुरमयी धुन

लोक गायक श्रवण सेंदरी ने अपनी विशिष्ट राजस्थानी गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने ‘थारी पल पल याद सतावे’, ‘रांद लाई खिचडो’, ‘मैं हूं भली जाटनी’, ‘सावन के महीना के माई’ और ‘सरर लेवे रे सबडको’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। उनकी गायकी पर श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आए। संध्या का सबसे भावुक क्षण उस समय आया, जब उन्होंने गौ माता की पीड़ा को अभिव्यक्त करने वाला भजन ‘सुन सांवरिया रे, गाय घणी दुख पावे’ प्रस्तुत किया। भजन के मार्मिक बोलों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

भावेश पाराशर की प्रस्तुतियों पर देर रात तक झूमे भक्त

कार्यक्रम की शुरुआत युवा गायक भावेश पाराशर ने गणपति वंदना ‘मेरे लाडले गणेश प्यारे-प्यारे’ से की। इसके बाद उन्होंने ‘मैं शरण पड़ा तेरी, गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना’ की प्रस्तुति से गुरु भक्ति का भाव जगाया। पाराशर ने अपनी ऊर्जावान गायकी से माहौल में उत्साह भरते हुए ‘मोरिया मारे मनड़े रा मालिक तू’, ‘मंडफिया वाला सेठ’, ‘उड़ उड़ रे म्हारा काला रे कागला’, ‘छोरिया मारी जाओ बजाओ गढ़ की गुजरिया’ और ‘लीलन प्यारी जाई जे’ जैसे लोकप्रिय भजन प्रस्तुत किए। इन गीतों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। लोक संगीत और भक्ति का यह संगम दशहरा मेले में पहुंचे लोगों के लिए यादगार अनुभव बन गया।

बालाजी महाराज और माता आशापुरा की झांकियों ने मोहा मन

भजन संध्या के दौरान मंदिर परिसर में भगवान बालाजी महाराज और माता आशापुरा की आकर्षक धार्मिक झांकियां सजाई गईं। सुसज्जित झांकियों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने माता रानी के दरबार में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र में सुख, शांति एवं खुशहाली की कामना की। भजनों के साथ धार्मिक झांकियों ने आयोजन के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

महाआरती के साथ हुआ भजन संध्या का समापन

देर रात तक चले आयोजन के समापन पर माता आशापुरा और भगवान बालाजी महाराज की भव्य महाआरती की गई। आरती में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इसके बाद जनसमूह में प्रसाद वितरित किया गया। राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 की इस भजन संध्या ने लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और संगीत की परंपरा को एक मंच पर प्रस्तुत करते हुए दुर्गा अष्टमी की शाम को भक्तिमय बना दिया।

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