राजस्थान

राजस्थान में 2 नवंबर से लागू होंगे जमीन रूपांतरण के नए नियम, आवेदन के दिन ही जारी होगा ऑनलाइन आदेश

Admin Desk
17 Oct 2026, 02:21 PM
Pramukh Samvad
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जयपुर। राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक और अन्य गैर-कृषि कार्यों के लिए उपयोग करने की प्रक्रिया में बदलाव होने जा रहा है। राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग) नियम-2026 आगामी 2 नवंबर से लागू होंगे। नई व्यवस्था के तहत भूमि रूपांतरण के लिए आवेदन करने पर उसी दिन ऑनलाइन अनुमति आदेश जारी किया जाएगा। इससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने और लंबी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।

नए नियमों के तहत कृषि भूमि का उपयोग आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत, पर्यटन, चिकित्सा, खेल परिसर, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा सहित 14 प्रकार के गैर-कृषि कार्यों के लिए किया जा सकेगा। रूपांतरण प्रीमियम की गणना ऑनलाइन होगी तथा निर्धारित राशि आवेदन के साथ जमा करनी होगी। आवासीय उपयोग के लिए आवेदन शुल्क 2,000 रुपये और अन्य प्रयोजनों के लिए 20,000 रुपये निर्धारित किया गया है। यह शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।

30 दिन में राजस्व रिकॉर्ड में होगा बदलाव

नई व्यवस्था में आवेदन के दिन अनुमति आदेश जारी होने के बाद उपखंड अधिकारी दस्तावेजों की जांच करेंगे। इसके लिए एक महीने की अवधि निर्धारित की गई है। दस्तावेज सही पाए जाने पर अथवा निर्धारित अवधि में कोई निर्णय नहीं होने की स्थिति में आवेदन के 30वें दिन ऑनलाइन पोर्टल पर नामांतरण और भूमि की श्रेणी में बदलाव की प्रक्रिया स्वतः पूरी हो जाएगी। इस अवधि के दौरान संबंधित भूमि को किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।

भूमि रूपांतरण पर अलग-अलग दरों से लगेगा प्रीमियम

नए नियमों में भूमि के उपयोग के आधार पर प्रीमियम की दरें निर्धारित की गई हैं। स्वतंत्र उपयोग के लिए डीएलसी दर का 5 प्रतिशत, व्यावसायिक एवं अन्य संबंधित उपयोग के लिए 10 प्रतिशत, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 0.5 प्रतिशत तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 2.5 प्रतिशत प्रीमियम निर्धारित किया गया है।

नियमों के अनुसार खातेदार को अधिकतम 500 वर्गमीटर भूमि पर अपना मकान या पशुशाला बनाने के लिए प्रीमियम से छूट मिलेगी। इसके अलावा निर्धारित शर्तों के अधीन कुछ पात्र परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों को भी छूट का प्रावधान रहेगा।

गलत दस्तावेज देने और बिना अनुमति उपयोग पर जुर्माना

भूमि रूपांतरण के लिए गलत जानकारी देने या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुमति प्राप्त करने पर आदेश निरस्त किया जा सकेगा। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रीमियम का दोगुना जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं, बिना अनुमति कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग करने पर निर्धारित प्रीमियम का चार गुना जुर्माना देना होगा।

नियमों के पालन की निगरानी के लिए पटवारी को वर्ष में कम से कम दो बार सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। रूपांतरण संबंधी अनुमति आदेश से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिन के भीतर जिला कलक्टर के समक्ष अपील कर सकेगा।

रूपांतरण के बाद निर्माण के लिए भी लेनी होगी मंजूरी

कृषि भूमि का रूपांतरण होने के बाद भी उस पर निर्माण कार्य शुरू करने के लिए संबंधित नियमों के अनुसार ले-आउट और भवन निर्माण की स्वीकृति लेना आवश्यक होगा। परियोजना तक कम से कम 30 फुट चौड़ा रास्ता होना जरूरी होगा। निर्धारित भूखंडों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करनी होगी। 500 वर्गमीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले मामलों में भवन मानचित्र की स्वीकृति भी अनिवार्य होगी।

नदी-नालों, तालाबों, जलस्रोतों, सार्वजनिक रास्तों, श्मशान, कब्रिस्तान, अवाप्त की जा रही भूमि और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में रूपांतरण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नए नियम लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग के लिए आवेदन, शुल्क भुगतान और अनुमति की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित होगी। हालांकि, भूमि रूपांतरण की अनुमति मिलने के बाद भी निर्माण से संबंधित अन्य आवश्यक स्वीकृतियां लेना अनिवार्य रहेगा।

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