वाशिंग्टन, 13 अक्टूबर। डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा जारी किए गए नए प्रस्ताव के तहत, अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) प्राप्त करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विश्वविद्यालयों (SEVP-certified institutions) को भारी-भरकम फीस चुकानी होगी। इसके तहत पहली बार OPT के लिए सिफारिश करने पर शिक्षण संस्थानों को $70,000 (लगभग ₹58-67 लाख) का भारी शुल्क देना होगा, जबकि किसी भी नवीनीकरण या एक्सटेंशन (जैसे STEM एक्सटेंशन) के लिए $30,000 की अतिरिक्त फीस का प्रावधान किया गया है।
भारतीय छात्रों और STEM टैलेंट इकोसिस्टम पर असर
अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले विदेशी छात्रों में सबसे बड़ा हिस्सा भारत का है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जुड़े कोर्स पूरा करने वाले भारतीय छात्र आमतौर पर 36 महीने (3 साल) तक इस प्रोग्राम का लाभ उठाकर अमेरिकी कंपनियों में काम करते हैं। शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू हुआ, तो इससे अमेरिका का संपूर्ण STEM टैलेंट इकोसिस्टम बुरी तरह प्रभावित होगा और भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी श्रम बाजार में प्रवेश पाना अत्यंत कठिन हो जाएगा।
विश्वविद्यालयों की भूमिका और लागत स्थानांतरण की संभावना
नियमों के अनुसार, यह फीस सीधे छात्रों या नियोक्ताओं (Employers) से न लेकर संबंधित शिक्षण संस्थानों द्वारा SEVIS सिस्टम में सिफारिश करने से पहले चुकाई जानी है। हालांकि, DHS का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय इस वित्तीय बोझ को प्रबंधित करने के लिए इसे छात्रों या नियोक्ताओं पर ट्यूशन फीस या अन्य शुल्कों के रूप में स्थानांतरित कर सकते हैं। इससे विश्वविद्यालयों पर भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिले को लेकर भारी दबाव बन जाएगा।
धोखाधड़ी रोकने का तर्क और प्रशासनिक पक्ष
अमेरिकी प्रशासन और DHS का तर्क है कि यह कड़ा कदम OPT कार्यक्रम में हो रहे कथित दुरुपयोग, फर्जी रोजगार दावों और 'पे-टू-स्टे' वीजा योजनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है। एजेंसी का दावा है कि इससे शिक्षण संस्थान अंतरराष्ट्रीय छात्रों की योग्यताओं की अधिक बारीकी से जांच करेंगे और कार्यक्रम की सत्यनिष्ठा को मजबूत किया जा सकेगा, जिससे घरेलू अमेरिकी श्रमिकों को बेहतर अवसर मिल सकें।
कानूनी चुनौतियां और आगे की प्रक्रिया
इस प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किए जाने के बाद आम जनता, शिक्षाविदों और हितधारकों को अपनी प्रतिक्रिया या कमेंट दर्ज कराने के लिए सीमित समय (30 से 60 दिन) दिया गया है। आव्रजन विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का अनुमान है कि जिस प्रकार पिछले समय में H-1B वीजा से जुड़े भारी-भरकम शुल्कों को अदालतों में चुनौती दी गई थी, उसी प्रकार हायर एजुकेशन ग्रुप्स और बिजनेस एसोसिएशन इस नए OPT शुल्क प्रस्ताव को भी अदालतों में चुनौती दे सकते हैं, जिससे इसके कार्यान्वयन में लंबी कानूनी देरी हो सकती है।