शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा ने रचा वित्तीय इतिहास, ₹4.34 करोड़ का शुद्ध लाभ; 97 डिफॉल्टरों पर रिकवरी कार्रवाई जारी
कोटा, 4 अक्टूबर। शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा लि.-696 आर (कोटा-बारां) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹4.34 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित कर अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है। संस्था की ओर से शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अध्यक्ष प्रकाश जायसवाल, उपाध्यक्ष महेंद्र नागर और मंत्री जमनालाल गुर्जर ने संस्था की वित्तीय उपलब्धियों, बकाया ऋण की वसूली और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं और बड़ी संख्या में डिफॉल्टर सदस्यों के बावजूद वर्तमान कार्यकारिणी ने कानूनी कार्रवाई और रिकवरी के माध्यम से संस्था की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है।
अध्यक्ष प्रकाश जायसवाल ने बताया कि संस्था का वार्षिक अधिवेशन रविवार को होटल द्वारिका, नेशनल हाईवे कोटा रोड, बारां में आयोजित किया जाएगा। अधिवेशन में राजस्थान सरकार के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री प्रमोद जैन "भाया", किशनगंज विधायक ललित मीणा, बारां विधायक राधेश्याम बैरवा, शिक्षा मंत्री के विशेषाधिकारी सतीश कुमार गुप्ता तथा राधाकृष्ण शिक्षा सहकारी बारां के अध्यक्ष बृजगोविन्द टेलर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
1374 डिफॉल्टरों से घटकर संख्या 97 पर पहुंची
उपाध्यक्ष महेंद्र नागर ने बताया कि फरवरी 2023 में नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने जब संस्था का कार्यभार संभाला, उस समय करीब ₹21 करोड़ की डिफॉल्ट राशि और 1374 डिफॉल्टर सदस्य थे। कार्यकारिणी द्वारा लगातार की गई रिकवरी कार्रवाई और कानूनी प्रयासों के बाद अब डिफॉल्टर सदस्यों की संख्या घटकर केवल 97 रह गई है। इन मामलों में न्यायालय और उपरजिस्ट्रार के माध्यम से रिकवरी की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि संस्था के कोष के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़े मामलों में पूर्व अध्यक्ष और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ ₹4.56 लाख तथा ₹2.70 लाख के गबन को लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। वहीं, तीन संतान का तथ्य छुपाकर पद पर बने रहने वाले एक संचालक को भी बर्खास्त कराया गया है।
सदस्यों को 4 प्रतिशत लाभांश देने का प्रस्ताव
संस्था की वित्तीय उपलब्धियों का लाभ सदस्यों तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रस्ताव रखे जाएंगे। अध्यक्ष ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अर्जित ₹4.34 करोड़ के शुद्ध लाभ में आवश्यक प्रावधानों के बाद ₹2.56 करोड़ की राशि शेष रहती है। इसमें से अंशधारकों को लगातार तीसरे वर्ष 4 प्रतिशत की दर से लाभांश देने का प्रस्ताव वार्षिक आमसभा में रखा जाएगा।
ऋण सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 4 लाख करने की तैयारी
सदस्यों की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सामान्य ऋण और इमरजेंसी ऋण की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी आमसभा में रखा जाएगा। वर्तमान में दोनों प्रकार के ऋण की सीमा ₹3-3 लाख है, जिसे बढ़ाकर ₹4-4 लाख करने की तैयारी है। संस्था ने अपने वित्तीय आधार को मजबूत करने के लिए कार्यकाल के दौरान ₹5 करोड़ की अतिरिक्त एफडी भी कराई है।
रविवार को भी खुलेगा कार्यालय, ऑनलाइन जमा की सुविधा शुरू
सदस्यों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संस्था ने कार्यालय संचालन में भी बदलाव किया है। अब गुरुवार का अवकाश समाप्त कर रविवार को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कार्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही सदस्यों के लिए ऑनलाइन लिंक और क्यूआर कोड के माध्यम से राशि जमा करने की सुविधा भी शुरू की गई है।
1943 में हुई थी संस्था की स्थापना, 6500 सदस्य जुड़े
मंत्री जमनालाल गुर्जर ने बताया कि शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा की स्थापना वर्ष 1943 में स्वर्गीय घांसीलाल द्वारा की गई थी। करीब 83 वर्ष पुरानी इस संस्था से वर्तमान में लगभग 6500 सदस्य जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि संस्था अपने सदस्यों को 50 पैसे प्रति सैकड़ा यानी 0.5 प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराती है। वित्तीय गतिविधियों के साथ संस्था पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, बेटी बचाओ और जल संरक्षण जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में भी भागीदारी निभा रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान संचालक गायत्री मीणा, अनुराधा शर्मा, कमल कुमार शर्मा, दिनेश कुमार मीणा, रवि प्रकाश गौतम, धर्मेंद्र कुमार मेघवाल, पूनम गौतम, शिवराज गोचर, दिनेश कुमार नागर और महावीर प्रसाद मीणा सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
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