नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के 11 नेताओं ने भारतीय निर्वाचन आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल की है। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अदालत से 10 प्रमुख मांगों पर विचार करने का आग्रह किया है।
SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
याचिका में देश के विभिन्न राज्यों में चल रही मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम अनुचित तरीके से मतदाता सूची से बाहर न हो।
चुनाव आयोग से मांगे सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया से संबंधित सभी रिकॉर्ड, फाइलें, बैठकों के कार्यवृत्त, समझौतों और आपत्तियों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके माध्यम से प्रक्रिया से संबंधित निर्णयों और उनके आधार की न्यायिक जांच कराने का आग्रह किया गया है।
ECINET और ERONET के रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग
याचिका में 24 जून 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित निर्णय की फाइल नोटिंग्स और ECINET तथा ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। याचिकाकर्ता इन रिकॉर्ड के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया और संबंधित डिजिटल गतिविधियों की जांच कराना चाहते हैं।
स्वतंत्र समिति से जांच कराने का प्रस्ताव
याचिका में मतदाता सूचियों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) से संबंधित प्रोटोकॉल की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। इस समिति के माध्यम से चुनावी व्यवस्था से जुड़े तकनीकी और प्रक्रियागत पहलुओं की समीक्षा कराने का आग्रह किया गया है।
बिना नोटिस मतदाता सूची से नाम नहीं हटाने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम उचित नोटिस और कानून के अनुसार सुनवाई का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए। याचिका में मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया है।
पंजाब समेत अन्य राज्यों में पात्र मतदाताओं के पंजीकरण की मांग
याचिका में पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र नागरिकों को कानून के तहत निर्धारित अंतिम तिथि तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अवसर देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का आग्रह है कि पात्र मतदाता केवल प्रक्रियागत कारणों से अपने मताधिकार से वंचित न रहें।
अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने चुनावी व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अदालत से आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
सविधान के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया है। इसके साथ ही अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई है।
मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे उचित आदेश जारी करने का आग्रह किया है, जिनसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे तथा प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा हो सके।
अदालत से अन्य उचित आदेश जारी करने का भी आग्रह
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए आवश्यक अन्य आदेश और निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।
याचिका में बताई गईं 14 कमियां
इस मामले में एक महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने संयुक्त याचिका में 14 कमियां चिह्नित की हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें कुछ दस्तावेजों की कमी, नौ याचिकाकर्ताओं के प्राधिकरण संबंधी दस्तावेजों में खामियां, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की धुंधली प्रति और कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी शामिल हैं।
सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने से पहले दूर करनी होंगी कमियां
बताया गया है कि याचिका में चिह्नित कमियों को दूर किए जाने के बाद ही इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में फिलहाल याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।
याचिका में की गई मांगें अभी याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के समक्ष रखी गई प्रार्थनाएं हैं। इन मांगों पर अंतिम निर्णय और किसी भी प्रकार के निर्देश के संबंध में अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।