कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत तीन नेताओं को विमान में लिया हिरासत में, 50 हजार रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड भरने के बाद रिहाई; एयर इंडिया ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर मांगा स्पष्टीकरण
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान के अंदर तीन नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटना ने देशभर में पुलिस के अधिकारों और विमानन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्टूबर को विमान के भीतर से हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि क्या पुलिस किसी उड़ान में सवार यात्री को विमान के अंदर जाकर हिरासत में ले सकती है? क्या इसके लिए एयरलाइन या पायलट की अनुमति जरूरी है? और क्या पुलिस बिना एफआईआर दर्ज किए भी किसी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है?
विमान के अंदर हिरासत, नेताओं ने बताया तानाशाही
अभिजीत दीपके ने हिरासत की कार्रवाई के दौरान वीडियो जारी कर पुलिस के कदम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश किस दिशा में जा रहा है, जहां लोगों को विमान के अंदर ही हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को तानाशाही बताते हुए कहा कि वे इससे डरने वाले नहीं हैं और गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं। इस दौरान दीपके और उनके साथियों ने महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए पुरुष पुलिसकर्मियों को भेजने की मांग भी की।
दिल्ली पुलिस ने बताई हिरासत की वजह, अगले दिन अदालत से रिहाई
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में बताया कि अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।
पुलिस ने बताया कि शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर एक वर्ष के लिए 50 हजार रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड भरने के बाद अदालत ने तीनों को रिहा कर दिया।
क्या पुलिस विमान के अंदर जाकर कर सकती है कार्रवाई?
पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पांडेय के अनुसार, भारतीय कानून के तहत पुलिस और जांच एजेंसियां देश की सीमा के भीतर कानूनी अधिकारों के आधार पर कार्रवाई कर सकती हैं। उनका कहना है कि जिस तरह पुलिस कार, ट्रेन या घर में जाकर कानून के मुताबिक कार्रवाई करती है, उसी तरह भारत में मौजूद विमान भी कार्रवाई के दायरे से पूरी तरह बाहर नहीं है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार का भी कहना है कि अपराध की आशंका होने पर उसे रोकने, संबंधित व्यक्ति को पकड़ने या सुरक्षा संबंधी खतरे से निपटने के लिए पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, विमान के भीतर प्रवेश और कार्रवाई के दौरान लागू विमानन सुरक्षा नियमों तथा संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखना भी आवश्यक है।
विमानन सुरक्षा नियम क्या कहते हैं?
भारत में हवाई अड्डों और विमानों की सुरक्षा के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरक्राफ्ट (सिक्योरिटी) रूल्स, 2023 अधिसूचित किए हैं। इसके अतिरिक्त भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 भी विमानन क्षेत्र से संबंधित कानूनी व्यवस्था और विभिन्न निकायों की भूमिकाओं को निर्धारित करता है।
एयरक्राफ्ट सिक्योरिटी रूल्स के नियम 22 में एयरोड्रोम में प्रवेश से संबंधित प्रावधान हैं। इनके तहत निर्धारित प्रवेश पास और लागू अनुमतियों के अनुसार प्रवेश किया जाता है। ऐसे में विमान के भीतर पुलिस की कार्रवाई को समझने के लिए पुलिस के अधिकारों के साथ-साथ विमानन सुरक्षा नियमों और प्रवेश की अनुमति से जुड़े प्रावधानों को भी देखना जरूरी है।
विमान के भीतर पुलिस के प्रवेश पर एयर इंडिया ने क्यों मांगा जवाब?
अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि संबंधित कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को हवाई अड्डे के परिसर में प्रवेश हेतु विशेष पास दिए गए थे। हालांकि, हवाई अड्डे के परिसर में प्रवेश की अनुमति और विमान के भीतर प्रवेश की प्रक्रिया अलग-अलग सवाल हैं।
द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया ने ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) से स्पष्टीकरण मांगा कि पुलिस को विमान के भीतर प्रवेश कैसे दिया गया और संबंधित एयरलाइन को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। इस घटनाक्रम ने पुलिस की कानूनी कार्रवाई और विमानन सुरक्षा प्रक्रियाओं के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विमान के दरवाजे बंद होने के बाद किसका होता है अधिकार?
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में एक एयरलाइन अधिकारी के हवाले से बताया गया कि उड़ान से पहले विमान के दरवाजे बंद होने से लेकर पार्किंग के बाद दरवाजे खुलने तक विमान की परिचालन स्थिति और कमांडिंग पायलट के अधिकार महत्वपूर्ण होते हैं। अधिकारी के अनुसार, दरवाजे खुलने के बाद गंभीर मामलों में सुरक्षा एजेंसियां विमान के भीतर प्रवेश कर सकती हैं।
इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विमान की स्थिति क्या थी, पुलिस को प्रवेश की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत मिली और संबंधित एयरलाइन को कार्रवाई की जानकारी कब दी गई। इन बिंदुओं को स्पष्ट किए बिना केवल पुलिस के सामान्य अधिकारों के आधार पर पूरी कार्रवाई का आकलन करना उचित नहीं होगा।
क्या पुलिस बिना एफआईआर के भी मांग सकती है यात्रियों की सूची?
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठा कि क्या पुलिस किसी एयरलाइन से यात्रियों की सूची या किसी विशेष यात्री की जानकारी मांग सकती है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियां ऐसी जानकारी मांग सकती हैं। उनका कहना है कि अपराध की रोकथाम के उद्देश्य से भी पुलिस जानकारी प्राप्त कर सकती है और प्रत्येक परिस्थिति में एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य नहीं है।
हालांकि, किसी यात्री की जानकारी मांगने, उसे हिरासत में लेने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के आधार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक मामले में पुलिस की कार्रवाई का औचित्य, लागू कानून और अपनाई गई प्रक्रिया महत्वपूर्ण होते हैं।
महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर भी उठा सवाल
हिरासत की कार्रवाई के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर अभिजीत दीपके और उनके साथियों ने आपत्ति जताई थी। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पांडेय के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई में महिला या पुरुष अधिकारी की भूमिका के साथ-साथ संबंधित परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार का कहना है कि पुरुष और महिला पुलिस अधिकारी कानून के दायरे में रहते हुए जांच तथा गिरफ्तारी संबंधी कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, महिलाओं से संबंधित मामलों में, विशेषकर रात के समय कार्रवाई के दौरान, लागू कानूनी प्रतिबंधों और अपवादों का पालन आवश्यक होता है।
सबसे बड़ा सवाल: पुलिस के अधिकार बड़े या विमानन सुरक्षा के नियम?
दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान के भीतर तीन नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटना ने पुलिस के कानूनी अधिकारों और विमानन सुरक्षा प्रक्रियाओं के बीच समन्वय को लेकर महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है। एक ओर पुलिस के पास अपराध की रोकथाम और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अधिकार हैं, तो दूसरी ओर विमानन सुरक्षा नियमों, यात्रियों की सुरक्षा और विमान के परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन भी जरूरी है।
इस पूरे मामले में सवाल केवल यह नहीं है कि पुलिस विमान के भीतर किसी को हिरासत में ले सकती है या नहीं, बल्कि यह भी है कि ऐसी कार्रवाई किन परिस्थितियों में, किस कानूनी आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत की जा सकती है।
यदि पुलिस को विमान के भीतर किसी यात्री को हिरासत में लेने का अधिकार है, तो ऐसी कार्रवाई के दौरान एयरलाइन, पायलट और विमानन सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका क्या होनी चाहिए? और यदि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था, तो एयर इंडिया को सुरक्षा नियामक से स्पष्टीकरण मांगने की जरूरत क्यों महसूस हुई?(जानकारी BBC न्यूज़ इनपुट से)