राजस्थान

90-A के तहत जमीन के उपयोग में मनमानी पर लगेगी रोक, बदले हुए भू-उपयोग के लिए नए सिरे से लेनी होगी मंजूरी

Sanjay kumar
05 Nov 2026, 11:26 AM
Pramukh Samvad
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जयपुर। राजस्थान में कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग के लिए किए जाने वाले 90-A भू-रूपांतरण के नियमों को लेकर नगरीय विकास विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अब जिस उद्देश्य के लिए कृषि भूमि का रूपांतरण कराया जाएगा, उसी प्रयोजन के लिए पट्टा या लीज-डीड जारी की जाएगी। रूपांतरण के बाद जमीन का उपयोग मनमर्जी से किसी दूसरे काम के लिए नहीं बदला जा सकेगा।

मूल रूपांतरण आदेश में बदलाव कर दूसरे उपयोग का पट्टा नहीं मिलेगा

विभाग के निर्देशों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने कृषि भूमि का आवासीय उपयोग के लिए 90-A रूपांतरण कराया है और बाद में वह उसी जमीन का व्यावसायिक उपयोग करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी। पहले मूल 90-A आदेश में स्वीकृत प्रयोजन के अनुसार पट्टा प्राप्त करना होगा। इसके बाद भू-उपयोग परिवर्तन की नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर निर्धारित शुल्क एवं प्रीमियम जमा कराना होगा।

शुल्क की बचत के लिए अपनाई जा रही व्यवस्था पर रोक

दरअसल, कुछ मामलों में भूमि का रूपांतरण आवासीय उपयोग के लिए कराया जाता था, लेकिन बाद में व्यावसायिक उपयोग का पट्टा मांगा जाता था। ऐसे मामलों में नए सिरे से भू-उपयोग परिवर्तन कराने के बजाय पुराने 90-A आदेश में संशोधन कर दूसरे उपयोग का पट्टा जारी कर दिया जाता था। इससे सरकार को नए भू-उपयोग के लिए निर्धारित शुल्क और प्रीमियम नहीं मिल पा रहा था।

जयपुर विकास प्राधिकरण में भी व्यवस्था को लेकर दिए निर्देश

जयपुर विकास प्राधिकरण में सीटीपी के पुराने पत्र का हवाला देकर 90-A के आदेश में संशोधन कर दूसरे प्रयोजन के लिए पट्टे जारी किए जाने के मामले सामने आए थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुराने रूपांतरण आदेश में इस प्रकार संशोधन कर दूसरे उपयोग के लिए पट्टा जारी करने का नियमों में प्रावधान नहीं है। इसी के चलते अब ऐसी व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है।

मास्टर प्लान और जोनल प्लान के अनुरूप दूसरे उपयोग पर भी लागू होंगे नियम

विभागीय आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि आवेदक मूल 90-A आदेश में स्वीकृत उपयोग के स्थान पर मास्टर प्लान, जोनल प्लान अथवा डीपीसीआर के अनुसार किसी अन्य प्रयोजन के लिए पट्टा या लीज-डीड चाहता है, तो भी पहले मूल रूपांतरण आदेश में स्वीकृत उपयोग के अनुसार ही पट्टा जारी होगा। इसके बाद दूसरे प्रयोजन के लिए नियमानुसार भू-उपयोग परिवर्तन कराना अनिवार्य होगा।

पट्टा नहीं लेना चाहते तो 90-A आदेश निरस्त कराने का विकल्प

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 90-A आदेश जारी होने के बाद यदि आवेदक पट्टा या लीज-डीड नहीं लेना चाहता है, तो वह आदेश निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित कृषि भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में मूल खातेदार का नाम पुनः दर्ज किया जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया में पहले जमा कराया गया भूमि रूपांतरण शुल्क और प्रीमियम वापस नहीं किया जाएगा।

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