करैरा की रामकथा में राम और कृष्ण की तुलना करते हुए कही थी टेढ़े-सीधे स्वरूप की बात, ब्रज के संतों और यादव समाज ने जताई नाराजगी
शिवपुरी। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद विवादों में घिर गए। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन पर ब्रज क्षेत्र के संतों और कृष्ण भक्तों ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी और किसी की धार्मिक भावनाएं आहत होने पर हाथ जोड़कर माफी मांगी।
क्या कहा था धीरेंद्र शास्त्री ने
करैरा में 28-29 अक्टूबर को आयोजित कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए कहा था कि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े दिखाई देते हैं। उनके चलने, खड़े होने और बांसुरी बजाने की मुद्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे राम सीधे हैं, जबकि तुम्हारे कृष्ण टेढ़े हैं। उन्होंने अयोध्या को सीधा और वृंदावन को टेढ़ा बताते हुए भी टिप्पणी की।
बांसुरी और धनुष को लेकर भी की टिप्पणी
अपने कथन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा था कि बांसुरी बजाना तो खेल है, लेकिन धनुष उठाना आसान नहीं है। इसी तरह गाय चराने और पर्वत उठाने की तुलना करते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने के प्रसंग की तुलना भगवान राम के भक्त हनुमान द्वारा पर्वत उठाने से की। इन टिप्पणियों के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला धार्मिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया।
ब्रज के संतों और यादव समाज ने जताई नाराजगी
बयान सामने आने के बाद मथुरा-वृंदावन सहित ब्रज क्षेत्र के संतों और कृष्ण भक्तों ने नाराजगी जताई। यादव समाज के लोगों ने भी भगवान श्रीकृष्ण की तुलना इस तरह किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई। विरोध करने वालों का कहना था कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन परंपरा में आराध्य हैं। उनके बीच श्रेष्ठता या भेद का भाव पैदा करने वाली टिप्पणियां उचित नहीं हैं। इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
धीरेंद्र शास्त्री ने दी सफाई, कहा- गलत अर्थ निकाला गया
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके कथन का गलत अर्थ निकाला जा रहा है और उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम तथा श्रीकृष्ण के बीच किसी तरह का भेद पैदा करना नहीं था। उन्होंने स्वयं को ठाकुरजी और ब्रज का भक्त बताते हुए कहा कि उनका नाम भी श्रीकृष्ण से जुड़ा है और वे हमेशा कृष्ण जन्मभूमि के विषय को लेकर आवाज उठाते रहे हैं।
प्रचलित पद की व्याख्या का दिया हवाला
शास्त्री ने बताया कि उन्होंने एक प्रचलित पद 'बंसी बजाना तो खेल ही है, पर धनुष उठाना खेल नहीं' के संदर्भ में बात कही थी। उनके अनुसार यह गोपियों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को उलाहना देने की भाव-व्याख्या थी। उन्होंने कहा कि उनकी बात को पूरे संदर्भ में समझने के बजाय वीडियो के कुछ अंश देखकर उन्हें कृष्ण विरोधी बताया जा रहा है।
भावनाएं आहत हुईं तो मांगी माफी
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं और उनके बीच कोई भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी बातों या व्याख्या से किसी भक्त, संत अथवा श्रद्धालु की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए क्षमा चाहते हैं। इस तरह विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की।