झुंझुनूं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सीसी सड़क निर्माण के दौरान हुए भीषण हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब ग्रामीण और मजदूर सीमेंट मिक्सर मशीन को धक्का देकर दूसरी जगह ले जा रहे थे। इसी दौरान मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई और उसमें करंट प्रवाहित हो गया। अचानक हुए इस हादसे में मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मृतकों में सड़क निर्माण का ठेका लेने वाले विष्णु सैनी भी शामिल हैं।
ग्रामीणों के सहयोग से बन रही थी सड़क
छापोली गांव में कदम कुंड तीर्थस्थल तक जाने वाला रास्ता लंबे समय से खराब हालत में था। रास्ते की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने सरकारी सहायता का इंतजार करने के बजाय आपसी सहयोग से चंदा एकत्रित कर सीसी सड़क बनवाने का निर्णय लिया था। पिछले तीन-चार महीनों से सड़क निर्माण का काम चल रहा था, लेकिन बीच-बीच में कार्य रुकता रहा। सोमवार को एक बार फिर निर्माण कार्य शुरू हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने ठेकेदार विष्णु सैनी से आग्रह कर काम दोबारा शुरू करवाया था।
मिक्सर मशीन में करंट फैलते ही मची अफरा-तफरी
सड़क निर्माण के दौरान सीमेंट मिक्सर मशीन को दूसरी जगह ले जाने के लिए ग्रामीण और मजदूर उसे धक्का देकर आगे बढ़ा रहे थे। इसी दौरान मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार केवी की बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट फैलते ही आसपास मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। हादसे में आठ लोगों की जान चली गई और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल गिदाराम सैनी के अनुसार, सभी लोग मिलकर मशीन को धक्का दे रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।
ठेकेदार सहित आठ लोगों की मौत
इस हादसे में सड़क निर्माण का काम कर रहे ठेकेदार विष्णु सैनी (38) के अलावा हरिराम गुर्जर (30), मंगलचंद गुर्जर (22), कालूराम गुर्जर (29), पवन गुर्जर (23), सुरेंद्र उर्फ सुरेश सैनी (30), मुकेश सैनी (27) और नितेश सैनी (32) की मौत हो गई। हादसे में महेंद्र सैनी, गीता देवी, संतरा देवी, गिदाराम सैनी और मंजू देवी घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है।
हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई और बिजली विभाग की व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 11 हजार केवी की बिजली लाइन पहले सड़क से दूर थी, लेकिन कुछ दिन पहले इसे बदलकर रास्ते के ऊपर से निकाल दिया गया था। उनका कहना है कि बिजली के तार काफी नीचे थे। ग्रामीणों के अनुसार, हादसे से पहले बिजली बंद करवाने के लिए फोन भी किया गया था, लेकिन जीएसएस पर कर्मचारी मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क निर्माण का काम पहले दो बार रुकवाया गया था। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।
मृतकों के शव रखकर धरना, 21 सदस्यीय संघर्ष समिति गठित
हादसे के बाद गांव में आक्रोश और शोक का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर मृतकों के शव मौके पर रखकर धरना शुरू कर दिया। मांगों को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने के लिए 21 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। स्थिति को देखते हुए गांव में पुलिस के साथ आरएसी के जवान भी तैनात किए गए।
मंत्री ने मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई ग्रामीणों की मांग
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा घटनास्थल पर पहुंचे और संघर्ष समिति के सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली। कदम कुंड क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के चलते मंत्री और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी मोटरसाइकिल से स्टेट हाईवे तक पहुंचे। वहां से मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क कर हादसे की जानकारी और मृतकों के परिजनों की मांगों से अवगत कराया।
मुआवजे की मांग, मृतक परिवारों को 20 से 25 लाख देने की उठी आवाज
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई गई है। सरकार की ओर से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए तथा घायलों के परिजनों को 50-50 हजार रुपए की सहायता दिए जाने की जानकारी दी गई। वहीं, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने प्रत्येक मृतक परिवार को 20 से 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
एक रास्ते की उम्मीद मातम में बदली
ग्रामीणों ने जिस रास्ते को बेहतर बनाने के लिए अपनी मेहनत और पैसे लगाए थे, उसी सड़क के निर्माण के दौरान हुए हादसे ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। आठ लोगों की मौत से कई परिवारों के सामने आजीविका और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। हादसे ने निर्माण कार्यों के दौरान हाईटेंशन बिजली लाइनों की सुरक्षा, बिजली आपूर्ति बंद कराने की व्यवस्था और कार्यस्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।