कोटा

कोटा में 290 करोड़ से बनेगा आधुनिक न्याय भवन, एक परिसर में होंगी 54 अदालतें

Admin Desk
02 Nov 2026, 12:14 PM
Pramukh Samvad
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ओम बिरला ने किया एकीकृत जिला न्यायालय परिसर का शिलान्यास, एयरपोर्ट जैसी सुरक्षा, 11 लिफ्ट और 1468 वाहनों की पार्किंग सहित मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

कोटा। राजस्थान के न्यायिक ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में कोटा में एकीकृत जिला न्यायालय परिसर का निर्माण किया जाएगा। 290 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाला यह नया न्याय भवन आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधाओं और सुरक्षा के व्यापक इंतजामों से सुसज्जित होगा। इस परिसर में जिला स्तर की 54 अदालतें एक ही स्थान पर संचालित होंगी, जिससे न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और विभिन्न मुकदमों के सिलसिले में अदालत पहुंचने वाले आम नागरिकों को बड़ी सुविधा मिलेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और प्रदेश के विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने रविवार को विधिवत शिलान्यास कर इस परियोजना की शुरुआत की। इस परियोजना को जुलाई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

करीब 4.47 लाख वर्गफीट में होगा निर्माण

नया एकीकृत जिला न्यायालय परिसर 3.21 हेक्टेयर आवंटित भूमि पर विकसित किया जाएगा। मुख्य भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल करीब 4.47 लाख वर्गफीट होगा। भवन में बेसमेंट, भूतल और पांच ऊपरी मंजिलों सहित कुल सात स्तर होंगे। पूरे परिसर को वातानुकूलित बनाया जाएगा तथा आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए 11 लिफ्ट स्थापित की जाएंगी। न्यायालय परिसर में 54 अदालतों के संचालन के साथ न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के लिए आवश्यक कार्यस्थल, आधुनिक सम्मेलन कक्ष, लाइब्रेरी, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। न्यायिक कामकाज को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने के लिए डिजिटल डिस्प्ले तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इस प्रकार न्यायालय से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम होगी और एक ही परिसर में अधिकतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

1468 वाहनों की पार्किंग, स्टेशन रोड से जुड़ेगा न्याय भवन

न्यायालय परिसर में आने वाले अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक पार्किंग व्यवस्था की जाएगी। यहां कुल 1468 वाहनों के पार्किंग की क्षमता विकसित होगी, जिसमें 734 कारों तथा 734 बाइक और स्कूटर के लिए स्थान निर्धारित किया गया है। परिसर तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए स्टेशन रोड से न्यायालय भवन तक 80 फुट चौड़ी चार लेन की संपर्क सड़क भी बनाई जाएगी। इससे न्यायालय आने-जाने वाले लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। भवन की सुरक्षा के लिए एयरपोर्ट की तर्ज पर जांच व्यवस्था विकसित की जाएगी। प्रत्येक प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे तथा तीन स्थानों पर सामान की जांच के लिए आधुनिक स्कैनिंग मशीनें स्थापित होंगी। इसके अतिरिक्त आग से सुरक्षा के लिए आधुनिक अग्निशमन एवं फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी तरीके से बचाव किया जा सके।

4.5 मेगावाट बिजली की जरूरत, सोलर प्लांट से भी होगी आपूर्ति

आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस विशाल न्यायालय भवन की अनुमानित विद्युत आवश्यकता करीब 4.5 मेगावाट होगी। ऊर्जा की जरूरत को पूरा करने और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए परिसर में 250 किलोवॉट क्षमता का सोलर प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। डिजिटल न्यायिक सुविधाओं, वातानुकूलन, लिफ्ट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए भवन की विद्युत एवं आधारभूत संरचना तैयार की जाएगी। परियोजना में न्यायालय परिसर को इस तरह विकसित करने की योजना है कि भविष्य में भी न्यायिक कार्यों का संचालन व्यवस्थित ढंग से किया जा सके।

ओम बिरला बोले, भवन से अधिक महत्वपूर्ण आम आदमी को समय पर न्याय

शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा में नए एकीकृत न्यायालय परिसर का निर्माण शहर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता केवल भव्य भवनों से नहीं, बल्कि आम नागरिक को सरल, सुलभ, त्वरित और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराने से तय होती है। अदालत में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक वातावरण, बैठने की उचित सुविधा और अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग स्थानों पर न्यायालय संचालित होने के कारण आम लोगों और अधिवक्ताओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नए परिसर में सभी न्यायालय एक ही स्थान पर संचालित होने से इन समस्याओं में कमी आएगी। उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए चैंबर निर्माण की निविदा प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। बिरला ने बताया कि न्यायालय परिसर के साथ मिनी सचिवालय विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग-अलग स्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।

मुख्य न्यायाधीश बोले, न्याय की गुणवत्ता ही न्यायालय की असली पहचान

राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने कहा कि किसी भी न्यायालय की पहचान उसकी भव्य इमारत से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण न्याय से होती है। नए न्यायालय परिसर का निर्माण करते समय महिलाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और समाज के कमजोर वर्गों की आवश्यकताओं को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को सुविधाजनक और प्रभावी बनाने का माध्यम है, लेकिन यह न्याय का विकल्प नहीं हो सकती। न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को पुराने लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सके।

अधिवक्ताओं के लिए बेहतर सुविधाओं पर भी दिया जोर

कार्यक्रम में कोटा के संरक्षक न्यायाधीश सुदेश बंसल ने अधिवक्ताओं के लिए बेहतर चैंबर, बैठने की व्यवस्था और आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसरों में अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं होना जरूरी है और इस प्रकार की व्यवस्थाएं प्रदेश के अन्य जिलों में भी विकसित की जानी चाहिए। विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि नया एकीकृत जिला न्यायालय परिसर वादकारियों और अधिवक्ताओं को एक ही स्थान पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। शिलान्यास समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज गौड़, अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष भारत सिंह अडसेला, महासचिव शम्भू सोनी सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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