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राहुल गांधी का बड़ा सियासी ऐलान: ‘ज्ञानेश कुमार CEC पद से हटेंगे और जेल भी जाएंगे’, रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन

Sanjay kumar
01 Nov 2026, 09:59 PM
Pramukh Samvad
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‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली में चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप, मोदी और अमित शाह को भी दी चुनौती; विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की उठाई मांग

INDIA गठबंधन 

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में बड़ी रैली आयोजित की। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ आयोजित इस रैली में कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। रैली का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाना और उनके इस्तीफे की मांग करना रहा। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से वोटों की चोरी हो रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तथा मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों के साथ वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। 

ज्ञानेश कुमार को हटाने और जेल भेजने की कही बात

राहुल गांधी ने अपने भाषण में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें उनके पद से हटाया जाएगा और वह जेल भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह देश के नागरिकों और युवाओं से यह बात कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने नहीं दिया जाएगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और संकेत दिया कि चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर आगे उनके खिलाफ भी जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। उन्होंने कथित वोट चोरी को सामान्य चोरी से अलग बताते हुए कहा कि यह देश के प्रत्येक नागरिक की आवाज और उसके लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मामला है। राहुल गांधी ने चुनावी अनियमितताओं को गंभीर संवैधानिक और लोकतांत्रिक सवाल बताते हुए कहा कि देश की जनता के मताधिकार के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाने पर उठाए सवाल

रैली में राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। राहुल गांधी ने मतदाता सूची से लगभग 15 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया और इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। दूसरी ओर, समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य दोहरे, अपात्र और अन्य कारणों से गलत तरीके से दर्ज नामों को हटाना है। आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। इस तरह मतदाता सूची को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। 

किसानों, युवाओं और आम नागरिकों के अधिकारों का भी उठाया मुद्दा

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनावी मुद्दों के साथ किसानों, युवाओं और मजदूरों की समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा हक नहीं मिल रहा, युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे और मजदूरों को भी उनका उचित अधिकार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने देश की संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में केंद्रित होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत ऐसा देश नहीं होना चाहिए, जहां विकास और अवसरों का लाभ केवल दो-तीन लोगों तक सीमित रह जाए। राहुल गांधी ने शिव की बारात का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें हर व्यक्ति शामिल हो सकता है और यही समावेशी भावना भारत की पहचान होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई किसान मेहनत करता है तो उसे उसका फल मिलना चाहिए और यदि कोई विद्यार्थी 18 घंटे पढ़ाई करता है तो उसे रोजगार का अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, देश को सही रास्ते पर लाने की दिशा में पहला कदम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना है।

अमित शाह ने रैली की तारीख और समय पर उठाए सवाल

विपक्ष की रैली के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी पर पलटवार किया। उन्होंने 1 नवंबर को रैली आयोजित किए जाने के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसी दिन 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है। अमित शाह ने आरोप लगाया कि जिस दिन सिख समुदाय के लोगों की हत्या हुई थी, उस दिन राहुल गांधी को राजनीतिक कार्यक्रम और जलसा आयोजित करने के बजाय पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए। उल्लेखनीय है कि INDIA गठबंधन की यह रैली केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े सवालों पर अपना विरोध जारी रखेगा। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा ज्ञानेश कुमार को पद से हटाए जाने और जेल भेजे जाने संबंधी बयान उनकी राजनीतिक चेतावनी और आरोप हैं, किसी न्यायिक फैसले या आयोग के खिलाफ साबित हुए अपराध का निष्कर्ष नहीं। 


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