जयपुर। राजस्थान में सार्वजनिक पार्कों की बदहाल स्थिति सुधारने और शहरी क्षेत्रों में हरित स्थानों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेशव्यापी कार्ययोजना तैयार की है। सरकार ने राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश की गई अनुपालना एवं प्रगति रिपोर्ट में बताया है कि राज्य के नगरीय निकायों के अंतर्गत आने वाले 3,319 सार्वजनिक पार्कों का सर्वे कर उनका डेटाबेस तैयार किया गया है। अब पार्कों के आकार के आधार पर उनके रखरखाव की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पार्कों की नियमित सफाई, हरियाली का संरक्षण, बागवानी और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
5,000 वर्गमीटर से बड़े पार्क नगर निकाय संभालेंगे
सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, 5,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले पार्कों के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकायों की होगी। वहीं, इससे छोटे पार्कों की देखरेख में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), मोहल्ला विकास समितियों और पंजीकृत सामाजिक संस्थाओं को शामिल किया जाएगा। इसके लिए संबंधित संस्थाओं के साथ तीन वर्ष की अवधि का समझौता किया जाएगा। इसके तहत पार्कों की नियमित सफाई, पौधों की देखभाल, बागवानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को संचालित करने की जिम्मेदारी तय होगी।
हाईकोर्ट में पेश हुई अनुपालना और प्रगति रिपोर्ट
सार्वजनिक पार्कों के संरक्षण और रखरखाव से संबंधित मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ के समक्ष अनुपालना एवं प्रगति रिपोर्ट पेश की। इसमें सरकार ने पार्कों के सर्वे, प्रबंधन की नई व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की जानकारी दी। सरकार की योजना है कि पार्कों के रखरखाव के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां निर्धारित हों और उनकी निगरानी व्यवस्थित तरीके से की जा सके।
अदालत की निगरानी में शुरू हुई पार्कों के संरक्षण की प्रक्रिया
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि जोधपुर के ऐतिहासिक उम्मेद उद्यान की खराब स्थिति से जुड़ी जनहित याचिका है। 11 अगस्त 2026 को राजस्थान उच्च न्यायालय ने उद्यान की बदहाल स्थिति पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम आयुक्त से समयबद्ध पुनर्विकास योजना मांगी थी। याचिका में उद्यान में गाद, कीचड़ और कचरा डाले जाने तथा हरियाली को नुकसान पहुंचने की शिकायत उठाई गई थी। अदालत ने तत्काल किए जा सकने वाले कार्यों और दीर्घकालीन सुधार के लिए अलग-अलग समयसीमा बताने को कहा था।
ग्रीन स्पेस को नागरिकों के जीवन से जोड़कर देखा अदालत ने
1 सितंबर 2026 के आदेश में उच्च न्यायालय ने उद्यानों के रखरखाव के लिए विशेषज्ञों की राय पर आधारित नीति बनाने, प्रदेश के पार्कों का सर्वे कराने और समयबद्ध कार्ययोजना के साथ विशेष अभियान चलाने के प्रस्तावों को स्वीकार किया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पार्कों और हरित क्षेत्रों का संरक्षण शहरी जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसके बाद राज्य सरकार ने सर्वे और नीति संबंधी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अब जोधपुर के पार्कों की विस्तृत कार्ययोजना और उनके रखरखाव की प्रगति पर अदालत में आगे विचार किया जाना है।
स्थानीय समितियों की भागीदारी से बढ़ सकती है जवाबदेही
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि छोटे पार्कों के रखरखाव में स्थानीय निवासियों और सामाजिक संस्थाओं को भागीदार बनाया जाएगा। इससे मोहल्लों के पार्कों की नियमित देखरेख में नागरिकों की सीधी भागीदारी संभव होगी। हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि समझौतों में सफाई, पानी, पौधों की देखभाल, कर्मचारियों की उपलब्धता और नियमित निरीक्षण जैसे दायित्व कितनी स्पष्टता से तय किए जाते हैं। पार्कों की वास्तविक स्थिति में सुधार तभी दिखाई देगा, जब तैयार की गई योजना का प्रभावी क्रियान्वयन और लगातार निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी।