कोटा, 31 अक्टूबर:
राष्ट्रीय दशहरा उत्सव 2026 के अंतर्गत शनिवार की शाम कोटा के ऐतिहासिक विजयश्री रंगमंच पर संस्कृति, संगीत और लोक कला का अद्भुत संगम देखने को मिला। रंगमंच देर रात तक चले भोजपुरी धमाल ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भोजपुरी गीतों से विजयश्री रंगमंच पूर्वांचल और बिहार की संस्कृति की महक से सराबोर हो उठा। प्रसिद्ध भोजपुरी गायक गोलू राजा और लोकप्रिय गायिका नेहा सिंह निष्ठा ने अपनी जादुई आवाज़ और एक से बढ़कर एक लोकप्रिय गीतों से ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल झूम उठा।
महापौर श्रीमती अनुसूइया गोस्वामी द्वारा पूर्वांचल और मिथिलांचल समाज के विशिष्ट अतिथियों के आत्मीय स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर गणपति मिश्र (अध्यक्ष, वैदेही चेतना समिति), एच.पी. शुक्ला (संरक्षक, पूर्वांचल समाज), आर.पी. सिंह (अध्यक्ष, पूर्वांचल समाज), रजीत राम यादव (कोषाध्यक्ष, पूर्वांचल समाज), शेखर पाठक (अध्यक्ष, मिथिलांचल युवा परिषद), शरद चंद्र झा (सचिव, मिथिलांचल युवा परिषद), राजीव मिश्रा (अध्यक्ष, बिहार नव उत्थान समिति), अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश ठाकुर, अमलेश गुप्ता (अध्यक्ष, नदीपार बिहार विकास समिति), दिनेश सिंह (कोषाध्यक्ष, नदीपार बिहार विकास समिति), पारस राम मिश्रा (अध्यक्ष, बिहार नवयुवक समिति, स्टेशन), ललित मिश्रा (संरक्षक, मिथिला नवयुवक समिति, स्टेशन) और ज्योतिषाचार्य सुजित झा (रामगंजमण्डी) सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत गायिका नेहा सिंह निष्ठा ने सुपरहित हिंदी और भोजपुरी पंक्तियों—"हां हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी, माटी को सोना कर लें... बड़ी कलाकारी है जी"—के साथ की, जिसे सुनते ही दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक लोकगीत "जईसन सोचले रहनी अइसन पियवा मोरे बाड़े" और "काहे देखेला ऐसे हंस के" पर अपनी शानदार प्रस्तुति दी। वहीं, जब उन्होंने लोकप्रिय ट्रैक "लॉलीपॉप लागेलू" और "हिलेला कोटा डिस्ट्रिक्ट" की पंक्तियां गाईं, तो कोटा में अध्ययनरत कोचिंग स्टूडेंट्स और युवा झूम उठे। इसके अलावा उन्होंने "काहे नथिया गढ़वलऽ उधार सईया जी", "तोर प्यार में पागल बानी" और "कॉलेज के डेट पा" जैसे गीतों से श्रोताओं को बांधे रखा।
दूसरी ओर, मंच पर अपनी अनूठी गायकी के लिए पहचाने जाने वाले गोलू राजा ने शुरुआत भगवान श्रीराम के भजनों और लोकगीतों से की। उन्होंने "चंवरिया डोले ना" और "लंका नगरिया में शोर भइल बा..." जैसे भक्तिमय गीतों से माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। इसके बाद उन्होंने अपने चर्चित और सुपरहिट गानों जैसे—"राजा जी कोरवे में जवान होके दी", "ओठलली से रोटी बोर के", "नथुनिया पागल कैले बा", "जिंदगी में जहर", और "हथियार के" प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।