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कोटा की मंदोदरी बनीं रुद्र जाट, अब स्कूल में मैडम नहीं, सर कहेंगे विद्यार्थी

Admin Desk
31 Oct 2026, 09:58 PM
Pramukh Samvad
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राजस्थान सेवा नियमों के तहत नाम और लिंग परिवर्तन की अनुमति, 28 अक्टूबर को बीकानेर शिक्षा निदेशालय ने जारी किया आदेश

कोटा, 31 अक्टूबर। राजस्थान के कोटा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सेवा में व्यक्तिगत पहचान और कानूनी अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। कोटा के सरकारी विद्यालय में कार्यरत शारीरिक शिक्षक मंदोदरी चौधरी अब रुद्र जाट के नाम से पहचाने जाएंगे। उन्होंने महिला से पुरुष के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराने और नाम परिवर्तन के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया था। निर्धारित प्रक्रिया के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने उनके आवेदन को मंजूरी प्रदान कर दी है।

28 अक्टूबर को जारी हुआ आधिकारिक आदेश

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार की ओर से 28 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में स्वीकृति जारी की गई। रिपोर्टों के अनुसार, यह अनुमति राजस्थान सेवा नियम, 1991 के नियम 8ए के अंतर्गत राजकीय निर्णय संख्या 5 में किए गए प्रावधानों के आधार पर दी गई है। शिक्षा विभाग की ओर से विधिक प्रक्रिया पूरी करने की शर्त पर सेवा अभिलेखों में नाम और लिंग परिवर्तन की अनुमति दी गई है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम रुद्र जाट और लिंग पुरुष दर्ज किया जाएगा।

कोटा के नांता स्थित सरकारी विद्यालय में हैं कार्यरत

मंदोदरी चौधरी वर्तमान में कोटा के नांता महल क्षेत्र स्थित राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) के पद पर कार्यरत हैं। नाम और लिंग परिवर्तन की अनुमति मिलने के बाद भी उनकी वर्तमान विद्यालय में सेवाएं जारी रहने की जानकारी सामने आई है। अब विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ के लिए भी उनकी नई पहचान के अनुरूप संबोधन होगा।

25 फरवरी 1997 को हुआ था जन्म, वर्ष 2019 से सरकारी सेवा में

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रुद्र जाट का जन्म 25 फरवरी 1997 को हुआ था। बचपन से ही खेलों में उनकी विशेष रुचि थी। इसी रुचि के चलते उन्होंने शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाई की और पीटीआई बने। वर्ष 2019 से वे सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। उन्हें जानने वाले लोगों के अनुसार, उनकी व्यक्तिगत पसंद और रहन-सहन में पुरुषों जैसी पहचान की झलक पहले से दिखाई देती थी।

क्या है लिंग परिवर्तन को लेकर कानूनी प्रावधान?

भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 लागू है। इसके साथ ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 भी प्रभावी हैं। अधिनियम की धारा 6 में पहचान प्रमाण-पत्र जारी करने तथा धारा 7 में लिंग परिवर्तन के बाद संशोधित पहचान प्रमाण-पत्र जारी करने का प्रावधान है।

धारा 7 के अनुसार, लिंग परिवर्तन के लिए निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया के बाद संबंधित चिकित्सा संस्थान के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट अथवा मुख्य चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर जिला मजिस्ट्रेट से संशोधित पहचान प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा सकता है। इसके आधार पर संबंधित व्यक्ति अपने आधिकारिक दस्तावेजों में नाम और लिंग में बदलाव करा सकता है। वर्ष 2020 के नियमों में भी इसके लिए प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

सरकारी सेवा अभिलेखों में भी दर्ज होगी नई पहचान

इस मामले में शिक्षा विभाग की स्वीकृति के बाद निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर संबंधित कर्मचारी की सर्विस बुक, विभागीय रिकॉर्ड और अन्य सेवा दस्तावेजों में नई पहचान दर्ज की जाएगी। इसका अर्थ है कि सरकारी नौकरी में रहते हुए भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्ति अपनी मान्य पहचान के अनुरूप आधिकारिक दस्तावेजों में बदलाव करा सकता है।

शिक्षा विभाग में पहला ऐसा मामला होने की चर्चा

मीडिया रिपोर्टों में कोटा शिक्षा विभाग की सीबीईओ महिला अधिकारी नवीन अरोड़ा के हवाले से इसे शिक्षा विभाग में इस तरह का पहला मामला बताया गया है। हालांकि, यह दावा कोटा शिक्षा विभाग के संदर्भ में है, इसे पूरे राजस्थान या देश का पहला मामला नहीं माना जाना चाहिए। कोटा का यह घटनाक्रम व्यक्तिगत पहचान, कानूनी अधिकारों और सरकारी प्रशासनिक व्यवस्था के बीच समन्वय का उदाहरण बनकर सामने आया है। अब मंदोदरी चौधरी की जगह रुद्र जाट नाम से उनकी नई पहचान सरकारी सेवा में दर्ज होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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