कोटा, 30 अक्टूबर। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू), कोटा के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी द्वारा लिखित पुस्तक 'टूर गाइडिंग : ए प्रैक्टिकल हैंडबुक फॉर एवरी गाइड' का शुक्रवार को जयपुर स्थित लोकभवन में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने विमोचन किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा भी मौजूद रहे। राजस्थान के विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं की बैठक के दौरान पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया गया।
शोधार्थी अभिषेक पोर्या और डॉ. सुनयना हैं सह लेखक
आरटीयू के सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि पुस्तक के सह लेखक पीएचडी शोधार्थी अभिषेक पोर्या तथा जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनयना हैं। विमोचन के दौरान राज्यपाल ने प्रो. निमित चौधरी को इस पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई दी। कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वीराज (आईएएस), उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका (आईएएस) सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु उपस्थित रहे।
23 अध्यायों में टूर गाइडिंग की व्यावहारिक जानकारी
प्रो. निमित चौधरी ने बताया कि 23 अध्यायों में तैयार की गई यह पुस्तक टूर गाइडिंग के विभिन्न पहलुओं की व्यापक और व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराती है। इसका प्रमुख उद्देश्य पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में कार्यरत लोगों के ज्ञान, कौशल और पेशेवर क्षमताओं का विकास करना है। पुस्तक में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े व्यावहारिक, नैतिक और टिकाऊ दृष्टिकोणों को भी महत्व दिया गया है।
बंगाली भाषी विद्यार्थियों और पर्यटन पेशेवरों को मिलेगा लाभ
उन्होंने बताया कि यह पुस्तक विशेष रूप से बांग्लादेश, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के बंगाली भाषी पर्यटन विद्यार्थियों एवं पेशेवरों के लिए उपयोगी साबित होगी। इन क्षेत्रों में बंगाली भाषा में उपलब्ध पर्यटन शिक्षा संबंधी संसाधन विद्यार्थियों को अपने विषय को बेहतर ढंग से समझने और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने में मददगार होंगे। इसके साथ ही पुस्तक पर्यटन शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी संदर्भ सामग्री के रूप में उपयोगी रहेगी।
पर्यटन शिक्षा में व्यावसायिक दक्षता विकसित करना उद्देश्य
प्रो. चौधरी के अनुसार, पुस्तक का उद्देश्य केवल टूर गाइडिंग की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों में पेशेवर दृष्टिकोण और कार्यकुशलता विकसित करना भी है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और कार्यरत गाइडों को अपने ज्ञान को बेहतर बनाने तथा पर्यटन उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी क्षमताओं का विकास करने में सहायता मिलेगी।