कोटा

राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026: राजस्थानी कवियों ने बांधा समां, मायड़ भाषा के गीतों और हास्य-व्यंग्य से गूंजा विजयश्री रंगमंच

Admin Desk
30 Oct 2026, 11:16 AM
Pramukh Samvad
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वीर रस की हुंकार, श्रृंगार की भावनाएं और हास्य की फुहारों ने मोहा श्रोताओं का मन, गीत ऋषि दुर्गादान सिंह गौड़ की स्मृति में सजा राजस्थानी कवि सम्मेलन

कोटा, 29 अक्टूबर। राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 के अंतर्गत गुरुवार को विजयश्री रंगमंच पर गीत ऋषि दुर्गादान सिंह गौड़ की स्मृति में राजस्थानी कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में राजस्थानी भाषा की मिठास, वीरता और शौर्य की अभिव्यक्ति, श्रृंगार रस की भावपूर्ण रचनाओं तथा हास्य-व्यंग्य की चुटीली प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मायड़ भाषा की समृद्ध परंपरा और लोकजीवन की संवेदनाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं मेला अधिकारियों ने भगवान श्रीगणेश और मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर भाजपा कोटा देहात के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रहलाद पंवार, करियर पॉइंट के निदेशक ओम माहेश्वरी, कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन भामाशाहमंडी के अध्यक्ष अविनाश राठी, जिला कुश्ती संघ कोटा के अध्यक्ष संजय शर्मा, भाजपा राजस्थान किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष योगेंद्र नंदवाना (अल्कु), भाजपा कोटा देहात के पूर्व युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष बद्री गौचर, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अरुण भार्गव, महापौर अनुसूइया गोस्वामी, आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा, उपायुक्त एवं सहायक मेला अधिकारी धीरज कुमार सोनी, मुख्य अभियंता एवं सहायक मेला अधिकारी महेश चंद्र गोयल तथा मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।

मां शारदे की वंदना से सजा काव्य मंच

प्रसिद्ध कवि भूपेंद्र राठौर ने ओजस्वी और प्रभावशाली अंदाज में मंच संचालन करते हुए कवि सम्मेलन को गति प्रदान की। कार्यक्रम की शुरुआत कवि प्रेम शास्त्री ने मां वीणावादिनी की वंदना से की। उन्होंने सुरीले स्वर में ‘थारे सरने अयो री मां, थारे सरने अयो री मां’ प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनकी प्रस्तुति पर पंडाल में मौजूद श्रोता भावविभोर हो उठे।

श्रृंगार रस की रचनाओं ने बिखेरे कल्पना के रंग

भक्तिरस के बाद कवियों ने श्रृंगार और कल्पना की दुनिया में श्रोताओं को भावनात्मक यात्रा कराई। प्रख्यात रचनाकार भेरूलाल भास्कर ने अपनी चर्चित रचना ‘उतरियों चांद पूनम पानी सु भरी पराता में...’ का पाठ किया। उनकी रचना में राजस्थानी जीवन, लोक संस्कृति और भावपूर्ण बिंबों की झलक ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

हास्य-व्यंग्य से गूंजे ठहाके

कवि सुरेश पंडित ने पारिवारिक जीवन और रिश्तों से जुड़े प्रसंगों को अपने चुटीले अंदाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब हंसाया। उनकी चर्चित रचना ‘मारा सात्तो वचन मानो जब जाके बाई, अंग आऊ...’ पर पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य, गीत और संगीत का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसमें श्रोताओं ने हर रस का आनंद लिया।

कई कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां

राजस्थानी कवि सम्मेलन में गौरस प्रचण्ड, राजेन्द्र पंवार, रामरतन वर्मा, भैरवलाल भास्कर, सर्जन शीतल, नहुष व्यास, परमानन्द दाधीच, विनोद संगम जैन, मनदीप सिंह, मुरलीधर गौड़, भूपेन्द्र राठौर, मोहित सक्सेना, सुरेश वैष्णव, रूपनारायण संजय शर्मा, मारुति नंदन, अभिषेक तिवारी, मुकेश गौतम, गिर्राज आमेठा, प्रतिष्ठा पारिक, गोविन्द जी हांकला, प्रकाश कसेरा परचम, जगदीश भारती, दुर्गेश शर्मा, हनुमान प्रसाद विजय, एकता शर्मा, बाबू बंजारा, निशामुनि गौड़, रेखराज स्वामी, मधु मनमौजी, सुरेश पंडित और प्रेम शास्त्री सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

मायड़ भाषा और राजस्थानी संस्कृति का दिखा जीवंत स्वरूप

कवि सम्मेलन ने राजस्थानी भाषा की साहित्यिक समृद्धि, लोक संवेदना और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान किया। वीर रस से लेकर श्रृंगार, भक्ति और हास्य-व्यंग्य तक विभिन्न काव्य विधाओं ने दर्शकों को देर रात तक कार्यक्रम से जोड़े रखा। राष्ट्रीय दशहरा मेले की सांस्कृतिक श्रृंखला में यह आयोजन राजस्थानी साहित्य और मायड़ भाषा के प्रति लोगों के जुड़ाव को अभिव्यक्त करने वाला रहा।

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