अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय पुरुष मलखंभ प्रतियोगिता का आगाज, पहले दिन 30 से अधिक मुकाबले; ऊर्जा मंत्री बोले—राज्य क्रीड़ा परिषद की सूची में शामिल कराने के होंगे प्रयास
कोटा। खंभे और रस्सी पर अद्भुत संतुलन, बेजोड़ शारीरिक क्षमता और कलात्मक कौशल के प्रदर्शन के बीच बुधवार को कोटा विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय पुरुष मलखंभ प्रतियोगिता शुरू हुई। कोटा विश्वविद्यालय और भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में 28 से 30 अक्टूबर तक आयोजित प्रतियोगिता में देश के 63 विश्वविद्यालयों की टीमें पदक और जनरल चैंपियनशिप के लिए मुकाबला कर रही हैं। पहले दिन पोल मलखंभ, हैंगिंग मलखंभ और रोप मलखंभ की 30 से अधिक स्पर्धाएं आयोजित हुईं।
उद्घाटन समारोह में राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी, कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, कोटा विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. विमला डूंकवाल, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. निमित्त रंजन चौधरी, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह धाकड़ सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
पारंपरिक खेलों को मिले प्रोत्साहन
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि मलखंभ जैसे कठिन खेल में दक्षता के लिए मेहनत, एकाग्रता और शारीरिक क्षमता जरूरी है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मलखंभ को राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद की सूची में शामिल कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहन मिल रहा है। मलखंभ भारतीय खेल परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे खेल कैलेंडर में स्थान मिलने से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं के आयोजन को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कोटा विश्वविद्यालय में प्रतियोगिता के आयोजन को गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
विधायक कल्पना देवी और संदीप शर्मा ने कहा कि मलखंभ में शरीर का संतुलन बनाए रखना और कठिन मुद्राओं का प्रदर्शन करना निरंतर अभ्यास का परिणाम है। खिलाड़ियों को पर्याप्त सुविधाएं, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।
63 विश्वविद्यालयों के खिलाड़ी दिखा रहे कौशल
कोटा विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. विमला डूंकवाल ने कहा कि मलखंभ में शारीरिक शक्ति के साथ संतुलन, लचीलापन, तालमेल और एकाग्रता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है।
आयोजन सचिव डॉ. विजय सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता में 63 विश्वविद्यालयों के खिलाड़ियों के साथ लगभग 120 कोच और मैनेजर भी कोटा पहुंचे हैं। मुंबई, बेंगलुरु, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक और आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों की टीमें भाग ले रही हैं। सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय, विक्रम विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, तमिलनाडु स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सहित कई टीमें खिताब की दावेदार हैं।उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और टीम के छह खिलाड़ियों के अंकों से परिणाम निर्धारित होता है। तीन दिवसीय प्रतियोगिता में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाली टीम विजेता बनेगी।
पद्मश्री उदय देशपांडे रहे मौजूद
समारोह में मलखंभ के देश के पहले पद्मश्री सम्मानित खिलाड़ी उदय देशपांडे, एआईयू के स्वतंत्र पर्यवेक्षक योगेश मालवीय और कार्यवाहक कुलसचिव संजय कुमार मीणा मंचासीन रहे। हरदोल व्यायामशाला, छावनी के खिलाड़ियों ने तकनीकी प्रमुख एवं कोच गोपाल सिंह सिसोदिया के निर्देशन में मलखंभ की विभिन्न विधाओं का शानदार प्रदर्शन किया। छात्र-छात्राओं की सामूहिक प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने सराहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चमन तिवारी ने किया। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक प्रवीण भार्गव, उपकुलसचिव डॉ. विपुल शर्मा, डॉ. मनीष वशिष्ठ, डॉ. जॉली भंडारी, प्रो. एनएल हेड़ा, कुलानुशासक डॉ. चक्रपाणि गौतम, डॉ. तीरथ सांगा, डॉ. धीरेंद्र सक्सेना, डॉ. मूलचंद शर्मा, डॉ. पायल दीक्षित, डॉ. शिखा दाधीच, धाकड़ भगत सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।