‘उस खिलजी को पद्मिनी की पावनता ने हरा दिया’ की ओजस्वी पंक्तियों पर गूंज उठी तालियां, देर रात तक काव्य रस में डूबे रहे श्रोता
कोटा, 28 अक्टूबर। 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 के अंतर्गत कोटा के ऐतिहासिक विजयश्री रंगमंच पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में मंगलवार को साहित्य, संस्कृति, देशभक्ति और हास्य-व्यंग्य का अनूठा संगम देखने को मिला। देश के प्रतिष्ठित कवियों और कवयित्रियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। राजस्थान के शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की गाथाओं से लेकर समकालीन राजनीति और आम जीवन की चुनौतियों तक, कवियों ने हर विषय को अपनी रचनाओं में जीवंत कर दिया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ साहित्यिक संध्या का आगाज

कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा तथा लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव (बूंदी), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंकित जैन, एसटी मोर्चा के प्रदेश महामंत्री अशोक मीणा तथा लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजेश डागा सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहे। महापौर अनुसूइया गोस्वामी एवं मेला अधिकारी ओपी मेहरा ने अतिथियों का सूत की माला और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।
प्रख्यात गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने मां सरस्वती की वंदना ‘हे मां सरस्वती तुम्हारी प्रथम करता वंदना’ प्रस्तुत कर साहित्यिक अनुष्ठान का शुभारंभ किया। उनकी मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कविता तिवारी ने जगाया राजस्थान के शौर्य का गौरव
कवि सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण ओजस्वी कवयित्री कविता तिवारी की प्रस्तुतियां रहीं। बुलंद आवाज और ओजपूर्ण अंदाज में उन्होंने देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम तथा राजस्थान की वीरता और स्वाभिमान की गौरवगाथा सुनाकर श्रोताओं में उत्साह भर दिया।
‘भारती की आरती उतारने को आतुर’, ‘तिरंगा कभी झुकने न दिया, चंबल की रवानी की कसम है’ और ‘घास वाली रोटियां खाकर स्वाभिमान रखा’ जैसी पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रप्रेम और संघर्ष की भावना को स्वर दिया। वहीं, ‘उस खिलजी को पद्मिनी की पावनता ने हरा दिया’ की ओजस्वी प्रस्तुति ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। राजस्थान के इतिहास, त्याग और स्वाभिमान को अभिव्यक्त करती इन पंक्तियों पर पंडाल तालियों से गूंज उठा।
जौहर और राजपूती आन की गाथा ने भरा जोश
अलवर से आए ओजस्वी कवि विनीत चौहान ने राजस्थान के गौरवशाली इतिहास, बलिदान और राजपूती आन-बान की गाथाओं को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनकी पंक्तियां—
‘सोलह हजार रानी कूदी, जौहर कुंडों को प्रणाम किया,
रजपूती आन बचाने को, पावन अग्नि स्नान किया।’
ने श्रोताओं में जोश और गौरव की भावना का संचार किया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।
हास्य-व्यंग्य ने गुदगुदाया, समसामयिक मुद्दों पर हुए प्रहार
कवि सुंदर कटारिया ने ‘शराबी और घरवाली’ विषय पर हास्यपूर्ण रचनाएं सुनाकर दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी चुटीली शैली और रोचक प्रस्तुतियों ने कवि सम्मेलन में हास्य का रंग घोल दिया।
वहीं, कवि शशिकांत यादव ने अपनी पैनी पंक्तियों के जरिए समकालीन राजनीति और व्यवस्था पर कटाक्ष किया। उन्होंने राम के नाम पर राजनीति और दावों के बीच विरोधाभास को रेखांकित करती पंक्तियां सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं ने ध्यानपूर्वक सुना।
कवि चेतन चर्चित ने राजनीतिक व्यंग्य के साथ जीवन की वास्तविकताओं और जिम्मेदारियों को भी अपनी रचनाओं में स्थान दिया। उनकी भावपूर्ण पंक्तियां—
‘सबके सामने खड़ा होना पड़ा,
जिम्मेदारी की ओर खड़ा होना पड़ा।
मजबूरियों ने ऐसे मोड़ पर ला दिया,
वक्त से पहले मुझे बड़ा होना पड़ा।’
ने जीवन के संघर्षों और समय से पहले जिम्मेदारियों का बोझ उठाने की विवशता को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
देशभर के ख्यातनाम रचनाकारों ने सजाया मंच
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में ओज के प्रख्यात कवि हरिओम पंवार, हास्य-व्यंग्य के चर्चित हस्ताक्षर सत्यनारायण सत्तन, प्रसिद्ध कवि जगदीश सोलंकी, शशिकांत यादव, चेतन चर्चित, विनीत चौहान, सुंदर कटारिया, प्रसिद्ध शायरा अंजुम रहबर तथा कवयित्री कविता तिवारी ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक संध्या को यादगार बनाया। कार्यक्रम में वीर रस, हास्य, व्यंग्य, संवेदना और देशभक्ति की विविध धाराएं एक साथ प्रवाहित हुईं। श्रोताओं ने देर रात तक कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और तालियों व भारत माता के जयकारों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।
राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 का यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति कोटा के अनुराग को दर्शाने वाला यादगार आयोजन बना। कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने सभी कवियों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।