कोटा

राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026: 'एक शाम पुराने गीतों के नाम’ कार्यक्रम में 80 और 90 के दशक के फिल्मी गीतों पर देर रात तक झूमे श्रोता

Admin Desk
27 Oct 2026, 12:34 AM
Pramukh Samvad
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कोटा, 26 अक्टूबर। शरद पूर्णिमा के बाद की शीतल चांदनी, हल्की ठंडी बयार और सदाबहार फिल्मी गीतों की मधुर धुनों ने सोमवार की शाम को यादगार बना दिया। कोटा के विजयश्री रंगमंच पर आयोजित राष्ट्रीय मेला दशहरा-2026 के संगीतमय कार्यक्रम ‘एक शाम पुराने गीतों के नाम’ में शहर के प्रतिष्ठित प्रोफेशनल्स और स्थानीय कलाकारों ने 1980 और 1990 के दशक के लोकप्रिय हिंदी फिल्मी गीतों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को पुरानी यादों के सफर पर ले गए। देर रात तक सजी सुरों की महफिल में हर गीत के साथ तालियों की गूंज और दर्शकों का उत्साह बढ़ता रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। समारोह में अतिथि के रूप में भाजपा राजस्थान के प्रदेश प्रवक्ता पंकज मेहता, कोटा व्यापार संघ के अध्यक्ष क्रांति जैन, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश प्रवक्ता एवं इटावा की पूर्व पालिका अध्यक्ष रजनी सोनी, भाजपा राजस्थान के विशेष आमंत्रित सदस्य गोविंद शर्मा, कोटा व्यापार संघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी तथा वरिष्ठ भाजपा नेता हिम्मत सिंह हाड़ा उपस्थित रहे।

महापौर अनुसूइया गोस्वामी, उप महापौर विवेक राजवंशी, अतिरिक्त जिला कलक्टर कृष्णा शुक्ला तथा मेला अधिकारी एवं आयुक्त ओपी मेहरा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उपायुक्त एवं सहायक मेला अधिकारी धीरज कुमार सोनी, मुख्य अभियंता एवं सहायक मेला अधिकारी महेश चंद्र गोयल, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर, पार्षद सीमा चौधरी और सुनीता नायक भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत पुरानी वीडियो प्रस्तुतियों के साथ हुई। इसके बाद णमोकार मंत्र और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। मंगलाचरण एवं स्वागत भाषण के पश्चात सौम्य जैन के मधुर बांसुरी वादन ने वातावरण को संगीतमय बना दिया।

संगीत संध्या का आगाज प्रमोद व्यास ने सदाबहार गीत ‘कस्मे वादे प्यार वफा, सब बातें हैं बातों का क्या’ से किया। इसके बाद कलाकारों ने एक से बढ़कर एक लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सर्वज्ञ ने ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार’, अमन माहेश्वरी ने ‘बेकरार करके हमें यूं न जाइए’ और सत्येंद्र वैष्णव ने ‘आने से उसके आए बहार’ गीत सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। सीए अजय जैन ने ‘जो तुमको हो पसंद’ और ‘जिंदगी की न टूटे लड़ी’ की प्रस्तुति दी, जबकि यशस्वी सिंह ने ‘जब भी जी चाहे नई दुनिया’ गीत से श्रोताओं को पुराने दौर की याद दिलाई।

डॉ. विजय सरदाना ने ‘रूप तेरा मस्ताना’, राजीव मल्होत्रा ने ‘सावन का महीना’ और डॉ. रवि राज सिंह ने ‘तू मेरी जिंदगी है’ गीत प्रस्तुत किया। गरिमा गुप्ता ने अपने गीतों से समां बांधा और दर्शकों की सराहना हासिल की।

शिक्षाविद गोविंद माहेश्वरी ने ‘नदिया चले चले रे धारा’ गीत सुनाया। नवनीत पंजाबी ने ‘लंबी जुदाई’ और ‘झूठ बोले कौवा काटे’ की प्रस्तुति देकर माहौल को सुरमय बनाया। प्रेम शर्मा ने ‘हाल क्या है दिलों का’, सुरेंद्र विजयवर्गीय ने ‘मेरी प्यारी बहनिया बनेगी’, जबकि एडीएम सिटी विनोद मल्होत्रा ने ‘ओ मेरी महबूबा’ गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वीणा जैन की प्रस्तुति ‘माय हार्ट इज बीटिंग’ ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में ‘कहता है जोकर’, ‘देखा न हाय रे सोचा न हाय रे’, ‘याद आ रहा है’ और ‘एक प्यार का नगमा है’ जैसे लोकप्रिय गीतों की गूंज से विजयश्री रंगमंच देर रात तक गुलजार रहा। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।

राष्ट्रीय मेला दशहरा-2026 की इस संगीतमय शाम ने पुराने हिंदी फिल्मी गीतों के प्रति लोगों के लगाव को एक बार फिर जीवंत कर दिया। गीत-संगीत, यादों और सुरों से सजी इस महफिल ने मेले में उपस्थित दर्शकों को एक यादगार संगीतमय अनुभव प्रदान किया।

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