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फ्रांस में छात्रों के आंदोलन ने पकड़ा उग्र रूप, महंगाई और बजट के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग

Admin Desk
26 Oct 2026, 07:49 PM
Pramukh Samvad
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स्कूलों में शिक्षकों की कमी और सुविधाओं के अभाव से शुरू हुआ विरोध देशव्यापी आंदोलन में बदला, सरकार की खर्च कटौती योजना और वेतन वृद्धि नहीं होने से बढ़ा जनाक्रोश

पेरिस। फ्रांस में स्कूलों की बदहाल व्यवस्थाओं और शिक्षकों की कमी के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। महंगाई से परेशान आम नागरिकों, कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनकारियों के शामिल होने से आंदोलन का दायरा बढ़ गया है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा।

स्कूलों की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन

फ्रांस में सितंबर के मध्य से छात्र स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, बेहतर भवनों और शैक्षणिक सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पेरिस के आसपास शुरू हुए विरोध की गूंज बोर्डो, रेनेस, लियोन, लिले और मार्सिले जैसे शहरों तक पहुंच गई। छात्र संगठनों और यूनियनों के समर्थन से आंदोलन लगातार व्यापक होता गया।

प्रदर्शनकारी विशेष रूप से 15 से 18 वर्ष तक के विद्यार्थियों के लिए सरकारी माध्यमिक विद्यालयों की व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षक, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

महंगाई ने आम जनता की नाराजगी को बढ़ाया

छात्रों के आंदोलन के साथ ही महंगाई और बढ़ते आर्थिक दबाव से परेशान नागरिक भी सड़कों पर उतर आए। सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर पहले से मौजूद असंतोष ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया। विभिन्न शहरों में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन कर सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की।

रिपोर्ट के अनुसार, 17 अक्टूबर को फ्रांस में लगभग छह लाख लोग सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

2027 के बजट ने बढ़ाई मुश्किलें

फ्रांस सरकार के 2027 के प्रस्तावित बजट को लेकर भी लोगों में असंतोष है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने लगभग 54 अरब यूरो की खर्च कटौती की योजना बनाई है। इसके साथ ही कुछ करों का बोझ बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार का उद्देश्य वित्तीय घाटे को कम करना बताया जा रहा है।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च कम करने से शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन में लगातार चौथे वर्ष वृद्धि नहीं किए जाने के फैसले ने भी नाराजगी बढ़ाई है। कर्मचारियों और शिक्षकों का तर्क है कि महंगाई के बीच वेतन नहीं बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच हिंसा की घटनाएं

फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण मार्च के रूप में शुरू हुए, लेकिन कुछ स्थानों पर हालात बिगड़ गए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का सहारा लिया। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ के हवाले से आई रिपोर्ट में एक प्रदर्शन के दौरान करीब एक हजार लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।

हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और घटनाओं के विस्तृत आधिकारिक आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

फिलिस्तीन के समर्थन में भी दिखे झंडे

सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर फिलिस्तीन के समर्थन में झंडे भी दिखाई दिए। इससे स्पष्ट हुआ कि आंदोलन में शामिल लोगों की चिंताएं केवल शिक्षा और बजट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे भी प्रदर्शन के दौरान सामने आ रहे हैं।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

फ्रांस में उभरता यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से शुरू हुआ विरोध अब महंगाई, वेतन, सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी खर्च में कटौती जैसे मुद्दों से जुड़ गया है। आने वाले समय में सरकार की प्रतिक्रिया और बजट संबंधी फैसले यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि प्रदर्शन शांत होते हैं या असंतोष और व्यापक रूप लेता है।

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