प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता पर टिप्पणी को लेकर राजस्थान में सियासी घमासान, मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक मर्यादा पर उठाए सवाल
जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से बिहार की राजधानी पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की राजनीतिक भाषा और कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार से हताश कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्गीय पिता के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना कांग्रेस की गिरती राजनीतिक मर्यादा और संस्कारहीनता को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की राजनीति अब व्यक्तिगत अपमान तक ही सीमित रह गई है?
कांग्रेस पर हताशा में अमर्यादित भाषा अपनाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि अपनी नाकामियों पर आत्मचिंतन करने के बजाय अपशब्दों का सहारा लेना कांग्रेस की हताशा को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि जनता राजनीतिक अहंकार और अपमान का जवाब अपने जनादेश से देती है। ओछी राजनीति से सत्ता हासिल नहीं होती, बल्कि जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ता है।
पटना की जनसभा से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद 25 अक्टूबर 2026 को पटना में आयोजित बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के कार्यक्रम के दौरान सामने आया। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित प्रशासनिक अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे थे।
इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की। इसके जवाब में खरगे की ओर से कथित तौर पर कहा गया, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इस टिप्पणी के सार्वजनिक होने के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अपमानजनक बयान करार दिया।
राजस्थान भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बाद राजस्थान में भी इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखने की अपील करते हुए बयान पर आपत्ति जताई है। भाजपा का कहना है कि राजनीतिक विरोध नीतियों और विचारों के आधार पर होना चाहिए, न कि नेताओं के परिजनों को निशाना बनाकर।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की राजनीति में नेताओं की बयानबाजी, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और राजनीतिक विरोध के तौर-तरीकों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब इस मामले में कांग्रेस की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर भी राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।