कोटा

शरद पूर्णिमा की चांदनी में गूंजे भक्ति के स्वर, तृप्ति शाक्य के भजनों पर झूम उठा दशहरा मेला

Admin Desk
25 Oct 2026, 11:10 PM
Pramukh Samvad
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कोटा, 25 अक्टूबर। 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेला-2026 में रविवार को शरद पूर्णिमा की चांदनी रात भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक उल्लास के नाम रही। विजयश्री रंगमंच पर आयोजित भव्य भजन संध्या में सुप्रसिद्ध भजन एवं पार्श्व गायिका तृप्ति शाक्य ने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा मेला परिसर भक्तिमय हो उठा। उनके लोकप्रिय भजनों पर श्रोता झूमते नजर आए और देर रात तक जय श्रीराम, राधे-राधे तथा मां के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।

गणेश वंदना से हुआ भजन संध्या का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर राजेश बिरला, पूर्व विधायक चंद्रकांता मेघवाल, पूर्व जिला प्रमुख राकेश बोयत, भाजपा के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार सोनी, महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष कविता पचवारिया, महिला नागरिक सहकारी बैंक कोटा की डायरेक्टर सुरभी झामनानी एवं अपर्णा सैनी, भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ कोटा शहर के जिलाध्यक्ष महीप सोलंकी, भारतेंदु समिति के महामंत्री सुनील जायसवाल, पद्मिनी हाड़ा, जायसवाल समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज जायसवाल तथा भाजपा मंडल महामंत्री जयेंद्र सिंह सोलंकी सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।

महापौर अनुसुईया गोस्वामी, उपायुक्त एवं सहायक मेला अधिकारी धीरज कुमार सोनी, मुख्य अभियंता एवं सहायक मेला अधिकारी महेश चंद्र गोयल, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर तथा पार्षद सीमा चौधरी और सुनीता नायक ने अतिथियों का पारंपरिक रूप से स्वागत एवं अभिनंदन किया।

‘कभी राम बनकर, कभी श्याम बनकर’ पर भावविभोर हुए श्रोता

भजन संध्या की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना में प्रस्तुत लोकप्रिय भजन ‘देवा ओ देवा गणपति देवा’ से हुई। इसके बाद तृप्ति शाक्य ने ‘ईश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है’ गीत की प्रस्तुति देकर आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण किया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण उनका लोकप्रिय भजन ‘कभी राम बनकर, कभी श्याम बनकर चले आना’ रहा। इस भजन के स्वर गूंजते ही श्रोता भक्ति भाव में डूब गए और पूरा पंडाल तालियों व जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद ‘खिलौना माटी का’ भजन के माध्यम से उन्होंने जीवन की नश्वरता और आध्यात्मिक चिंतन का संदेश दिया।

भगवान श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम पर आधारित ‘श्याम चूड़ी बेचने आया’ तथा ‘श्यामा आन बसो वृंदावन में’ जैसे भजनों ने श्रोताओं को ब्रज की भक्ति परंपरा से जोड़ दिया। तृप्ति शाक्य की सुरमयी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध रखा।

देवी भजनों से हुई शक्ति की आराधना

भजन संध्या में देवी मां की महिमा का गुणगान भी विशेष आकर्षण रहा। गायिका ने ‘कभी दुर्गा बनकर, कभी काली बनकर’, ‘मानो तो मैं गंगा मां हूं’ और ‘अंबे तू है जगदंबे काली’ जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। देवी भजनों के दौरान पंडाल में शक्ति की उपासना और श्रद्धा का अनूठा माहौल देखने को मिला।

इसके साथ ही ‘शिव शंकर चले रे कैलाश’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ और ‘राम नाम की लूट है’ जैसे भजनों ने कार्यक्रम में भक्ति और उत्साह का रंग और गहरा कर दिया। हर प्रस्तुति के साथ श्रोताओं की सहभागिता बढ़ती गई और पूरा परिसर सुर, ताल तथा भक्ति के संगम में सराबोर नजर आया।

आरती के साथ हुआ भजन संध्या का समापन

कार्यक्रम के अंतिम चरण में ‘काना बरसाने में आ जयो’ और ‘कैसा चक्कर चलाया श्याम’ जैसे भजनों ने श्रोताओं को कृष्ण भक्ति के रंग में रंग दिया। अंत में पारंपरिक ‘आरती कुंज बिहारी की’ के साथ भजन संध्या का समापन हुआ। शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी, तृप्ति शाक्य की मधुर आवाज और लोकप्रिय भजनों की गूंज ने राष्ट्रीय दशहरा मेले की इस शाम को यादगार बना दिया। विजयश्री रंगमंच पर आयोजित यह भजन संध्या श्रद्धा, संगीत और आध्यात्मिक आनंद का ऐसा संगम रही, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।

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